सीबीएसई स्कूल अब न खुद बेच पाएंगे और न दुकान बताएंगे
जौनपुर । निजी स्कूल अगर यूनिफॉर्म (पोशाक), पुस्तकें व स्टेशनरी आदि निर्धारित (फिक्स्ड) दुकान से खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव डालते हैं तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। सीबीएसई ने एक अगस्त को सभी स्कूलों को यह हिदायत दी है। बोर्ड ने कहा है कि अभिभावक यदि इसकी शिकायत बोर्ड के पास करेंगे तो ऐसे स्कूल पर सख्त कार्रवाई होगी।

बोर्ड से सूचना के अधिकार के तहत अभिभावकों ने इसकी जानकारी मांगी थी। सूचना के अधिकार में बोर्ड ने कहा है कि अभिभावक बोर्ड को इसकी जानकारी दें कि स्कूल उनके ऊपर किताबें, यूनिफॉर्म आदि खरीदने का दबाव डालता है। ऐसे अभिभावक के नाम को गुप्त रखा जाएगा। अभिभावकों की शिकायत पर संबंधित स्कूल पर कार्रवाई होगी। ऐसे स्कूल की मान्यता को बोर्ड रद्द करेगा। जहां तक किताबों की बात है तो पाठ्यक्रम में केवल एनसीईआरटी किताबें चलाई जानी हैं। ये किताबें अभिभावक कहीं से भी खरीद सकते हैं।
बोर्ड से स्पष्ट किया है कि स्कूलों के खिलाफ एफिलिएशन बाइलॉज (संबद्धता परिनियम) 2018 के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड के ताजा फरमान से यह साफ है कि स्कूल अब न तो किताब व पोशाक खुद बेच पाएंगे और न ही अपनी पसंद की दुकान बताएंगे। बता दें कि स्कूल अभिभावकों के ऊपर दबाव डालते हैं कि उन्हें स्कूल की तय दुकान से ही किताबें लेनी है। यूनिफॉर्म की खरीदारी करनी है। स्कूल बैग से लेकर जूता-मोजा, स्टेशनरी तक की खरीद पर स्कूल का दबाव रहता है। नये सत्र की शुरुआत में तो ज्यादातर स्कूल परिसर में ही दुकान लगा दी जाती है। इस दुकान में न तो अभिभावकों को कोई छूट मिलती है और न ही यहां मिलने वाली सामग्री की क्वालिटी अच्छी होती है। अभिभावकों की मजबूरी होती है कि उन्हें उसी दुकान से खरीदारी करनी है,लेकिन बोर्ड ने इस पर सख्ती की है।
स्कूलों में खुली दुकानों को हटाने का आदेश
बोर्ड ने सभी स्कूलों को उनके परिसर से दुकानों को हटाने का आदेश भी दिया है। क्योंकि स्कूल में चल रहे दुकानें नियम के खिलाफ है। बोर्ड के अनुसार स्कूल एक शैक्षणिक संस्था है और उसे कॉर्मिशियल नहीं बनाया जा सकता है। इस कारण जिन स्कूलों ने यूनिफार्म, किताबें, स्टेशनरी आदि की दुकानें खोली गई हैं उसे 15 दिनों के अंदर हटा दें।
कई स्कूलों में तो सालभर किताबें और यूनिफॉर्म की दुकानें लगी रहती हैं। स्कूल प्रशासन ने एजेंसियों को स्कूल परिसर में एक निर्धारित जगह दे दी है, जहां पर जाकर विद्यार्थी या अभिभावक अपने सामान खरीदते हैं। स्कूल का यह सिलसिला केवल नये सत्र की शुरुआत में नहीं बल्कि पूरे सालभर चलता है। इससे अभिभावकों का खर्च कई गुना तक होता है।

Author: fastblitz24



