आरिज खान की फांसी की सजा को उम्र कैद में बदला
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सनसनीखेज बाटला हाउस मुठभेड़ मामले में दोषी आरिज खान की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने घटना के समय बीटेक (इंजीनियरिंग) के छात्र आरिज को बेशक सजा में राहत दी है, लेकिन खंडपीठ ने उसका आतंकी का तमगा कायम रखा है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल एवं न्यायमूर्ति अमित शर्मा की खंडपीठ ने अपने 105 पेज के फैसले में माना है कि आरिज खान आतंकी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था। वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा था, लेकिन इसी बीच वह गैरकानूनी गतिविध में शामिल लोगों के संपर्क में आया और आतंकी बन गया।
दिल्ली में पांच जगहों पर 13 सितंबर, 2008 को धमाके हुए। इन धमाकों में 39 लोग मारे गए। 19 सितंबर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को जामिया नगर के बाटला हाउस में आतंकियों के छुपे होने की जानकारी मिली। हालांकि आतंकियों की संख्या पांच होगी इसका अंदाजा पुलिस बल को नहीं था।
यह था पूरा मामला
पुलिस बल का नेतृत्व इस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा कर रहे थे। फ्लैट नम्बर एल-18, बाटला हाउस पर जब पुलिस ने पहुंची तो अंदर से गोलीबारी शुरू हो गई। इंस्पेक्टर मोहन चंद्र को कई गोली लगीं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई। वहीं दो आतंकी भी मौके पर मार गिराए गए। जबकि एक आतंकी शहजाद कुछ घंटों बाद ही पुलिस की गिरफ्त में आ गया था। आरिज खान वहां से फरार हो गया था। आरिज 14 फरवरी, 2018 को गिरफ्तार हुआ था। साकेत अदालत ने 8 मार्च, 2021 को उसे दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। आरिज पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
पीठ ने कहा कि दरअसल पूरे मामले पर जब गौर किया गया तो पाया गया कि यह मुठभेड़ पूर्व नियोजित नहीं थी और ना ही पूर्व मध्यस्थता से थी। पुलिस बल दिल्ली में पांच जगह हुए धमाके की जांच करते हुए एक संदिग्ध की तलाश में वहां पहुंचा था।
सुधरने का मौका दिया
खंडपीठ ने कहा कि दोषी की मनौवैज्ञानिक आंकलन रिपोर्ट पर विचार किया गया। जिसमें सुधार की संभावना को नकारा नहीं गया था। पीठ ने कहा कि एक उच्च शिक्षित 23 साल का युवक बहक सकता है। ऐसे में उसे जेल की सलाखों के पीछे रखकर सुधारने का प्रयास किया जा सकता है। वहीं पीठ ने मोहन चंद्र शर्मा की हत्या को लेकर कहा कि यहां कई ऐसे बिन्दु सामने आए जिससे आरिज खान की गोली मोहन चंद्र शर्मा को लगी ऐसा साबित नहीं हुआ। हालांकि पीठ ने माना कि सामूहिक हमले में वह शामिल था। इसलिए उसे हत्यारा माना जाना उचित है।

Author: fastblitz24



