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ऑस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कार, परंपरा और भाषा का एक दीपक बुझा

 

  • डॉ. इंदुमती पांडेय का आस्ट्रेलिया में निधन
  • जनपद के समाज और शिक्षा जगत से था गहरा नाता

        जौनपुर। राजा श्री कृष्ण दत्त महाविद्यालय में शिक्षक प्रशिक्षण विभाग (बीएड ) की पूर्व प्राध्यापक डॉ. इंदुमती पांडेय का इसी सप्ताह सोमवार को ऑस्ट्रेलिया के क्लेटन में किटसन रोड स्थित अपने घर पर देहावसान हो गया। वे 96 वर्ष की थी और अपने पीछे अपनी एकमात्र सुपुत्री और उसका परिवार छोड़ गई हैं। आस्ट्रेलिया में प्रवासी भारतीयों की एक संस्था “भारतालय” द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने बताया कि वे एक बहुत ही साहसी और प्रगतिशील महिला थीं। श्रीमती पांडेय एक शिक्षिका थीं, जो दशकों तक मैक्लॉड और ब्रैंडन पार्क में मानविकी पढ़ाती रहीं। वह संगीतकार और संस्कृत की विद्वान भी थीं। उन्होंने लोगों का एक बड़ा समुदाय बनाया जो क्लेटन स्थित उनके घर पर अक्सर ही सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम के लिए इकट्ठा होते थे। उनकी पुत्री ने भरतनाट्यम् ,अरंगेत्रम और ओडिसी नृत्य में काफी यश प्राप्त किया है।

जिंदगी के साथ भी, जिंदगी केबाद भी

         जीवन पर्यंत शिक्षा और ज्ञान का प्रकाश फैलती श्रीमती पांडेय हमेशा शिक्षिका बनी रहना चाहती थीं। इसी लिए कई साल पहले उन्होंने चिकित्सा अनुसंधान के लिए अपना शरीर दान करने के लिए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। शोध के लिए अपना शरीर मेलबर्न यूनिवर्सिटी को दान करते समय उन्होंने कहा था कि चूँकि वे जीवन भर एक शिक्षिका रही हैं और वे शिक्षा में योगदान देना चाहती थीं। इसलिए शरीर का अंतिम संस्कार नहीं होगा। पूरा जीवन सनातन परंपरा के अनुरूप बिताने वाली महिला का यह निर्णय उनकी प्रगतिशीलता का ठोस उदाहरण है।

उनके पति डॉ. रमाशंकर पांडेय का पहले ही देहांत हो चुका है। आस्ट्रेलिया में बसने से पहले डॉ. पांडेय जौनपुर के तिलकधारी महाविद्यालय और उसके बाद काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विधि संकाय में अध्यापन कर चुके हैं। डॉ. पांडेय के भतीजे मनीष पांडेय टाइम्स समूह के जौनपुर प्रतिनिधि हैं। बचपन की स्मृतियों में डॉ. इंदुमती पांडेय का स्मरण करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द उपाध्याय ने भी उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है।

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Author: fastblitz24

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