- 16 को होगी सुनवाई, अदालत ने मांगा व्हाट्सएप नम्बर और ईमेल आईडी
, जौनपुर। नगर में मौजूद अटाला मस्जिद को मंदिर बताते हुए पीस कमेटी जामा मस्जिद के खिलाफ दाखिल वाद में अदालत ने प्रतिवादी को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया, एवं इस नोटिस की पैरवी करने का निर्देश वादी को ही दिया। बता दें कि अपर सिविल जज (जू.डि.) की अदालत ने यह भी कहा है कि प्रतिवादी का व्हाट्स एप या फिर ई-मेल आईडी उपलब्ध कराई जाए ताकि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नोटिस भेजा जा सके। मामले की अगली सुनवाई अब 16 जुलाई को होगी।
यह है विवाद
13वीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक ने आक्रमण किया और जौनपुर पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। उसने अटला देवी मंदिर की भव्यता देखी और उसे तोड़वा दिया। मंदिर के खंभों पर ही मस्जिद का आकार दे दिया, जो वर्तमान में अटाला मस्जिद है। वादी ने न्यायालय से मांग किया कि सनातन धर्मावलंबियों को वहां पूजा अर्चना करने का अधिकार दिया जाए। अटाला मस्जिद को प्राचीन अटला देवी मंदिर बताते हुए पीस कमेटी जामा मस्जिद के खिलाफ वाद दाखिल किया गया। वादी के अधिवक्ता ने बहस के दौरान अदालत से स्थायी आदेश की मांग की थी। लेकिन, अदालत ने आदेश दिया कि प्रतिवादी को सुनवाई का अवसर दिए बिना एक पक्षीय आदेश जारी करने का कोई आधार प्रतीत नहीं होता है। इसलिए प्रतिवादी को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। वादी को नोटिस की पैरवी करने का आदेश भी दिया। मुकदमे में वक्फ अटाला मस्जिद जरिये सेक्रेटरी को विपक्षी पक्षकार बनाया गया है। दरअसल, मड़ियाहूं निवासी और स्वराज वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा ने पीस कमेटी जामा मस्जिद मोहल्ला सिपाह के खिलाफ वाद दायर किया है। उनका कहना है कि नगर में 13वीं शताब्दी में तत्कालीन राजा विजय चंद्र ने अटला देवी की मूर्ति स्थापित कर मंदिर बनवाया था। इसमें सनातन धर्म के लोग पूजा-कीर्तन करते थे। इस मंदिर पर अधिकार पूजा पाठ और धार्मिक गतिविधियों का अधिकार हिंदुओं के पास होना चाहिए। दाखिल किए गए वाद में कब्जा किए गए परिसर में अब भी मौजूद सनातन चिन्हों का भी जिक्र प्रमाणके लिए किया गया है।

Author: fastblitz24



