नई दिल्ली: ‘एक देश, एक चुनाव’ (One Nation, One Election) पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की मंगलवार को बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे पीपी चौधरी ने कहा कि सभी सदस्य सकारात्मक रुख अपनाते हुए एक टीम की तरह काम कर रहे हैं।
बैठक के दौरान जस्टिस आर.के. अवस्थी और पूर्व चीफ जस्टिस यू.यू. ललित ने प्रेजेंटेशन दिया। इस दौरान संविधान संशोधन विधेयक की समीक्षा पर चर्चा हुई, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव है।

विपक्ष का विरोध और सरकार का पक्ष
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके सहित कई विपक्षी दल इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। सरकार का तर्क है कि इससे चुनावी खर्च में कमी आएगी, प्रशासनिक चुनौतियां कम होंगी और बार-बार होने वाले चुनावों से बचा जा सकेगा।
संविधान संशोधन पर उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट को केंद्र सरकार ने 18 सितंबर 2024 को मंजूरी दी थी। JPC की पहली बैठक 8 जनवरी को हुई थी, जबकि दूसरी बैठक 31 जनवरी को आयोजित हुई।
दूसरी बैठक की प्रमुख बातें
दूसरी बैठक में विधेयक पर सुझाव लेने के लिए विभिन्न हितधारकों की सूची बनाई गई। इनमें सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, चुनाव आयोग, राजनीतिक दल, राज्य सरकारें, शिक्षकों के संगठन, उद्योग संघ (CII, फिक्की), बैंकिंग सेक्टर, आरबीआई, बार काउंसिल, थिंक-टैंक और शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं।
बैठक में चर्चा के प्रमुख बिंदु:
प्रियंका गांधी वाड्रा और सुप्रिया सुले सहित कई विपक्षी नेताओं ने व्यापक परामर्श की मांग की।
पीपी चौधरी ने कहा कि शिक्षकों, छात्रों और प्रवासी श्रमिकों की राय भी ली जाएगी।
कुछ सदस्यों ने जनता की राय को सर्वोपरि मानते हुए आम सहमति की जरूरत पर जोर दिया।
विपक्षी दलों ने हर बैठक की कार्यवाही की लिखित प्रति मांगी, जिसे समिति अध्यक्ष ने अस्वीकार कर दिया।
कांग्रेस के मनीष तिवारी और डीएमके के पी. विल्सन ने इस मांग को संसदीय नियमों के तहत उचित बताया।
कुछ विपक्षी सदस्यों ने शैक्षणिक संस्थानों को शामिल करने पर आपत्ति जताई, इसे समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।
JPC जल्द ही हितधारकों से राय लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी, जिसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

Author: Delhi Desk
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