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मात्र 9.75 करोड़ में बेच दी गई थी 300 करोड़ की मील

औद्योगिक जौनपुर की पहचान रही शाहगंज चीनी मिल जब्त

जौनपुर : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बसपा सरकार में हुए चीनी मिल बिक्री घोटाले में पूर्व एमएलसी मोहम्मद इकबाल की जिन तीन चीनी मिलों को बृहस्पतिवार को जब्त किया है, उनमें जौनपुर की औद्योगिक पहचान रही शाहगंज चीनी मिल भी शामिल है। जब्त की गई तीनों मिलों की कीमत करीब एक हजार करोड़ रुपए है।

ईडी के अनुसार, जौनपुर की शाहगंज चीनी मिल के साथ देवरिया की बैतालपुर व भटनी चीनी मिलों को इकबाल और उनके करीबियों ने मैलो इंफ्राटेक, डायनेमिक शुगर्स और हनीवेल शुगर्स नामक शेल कंपनी बनाकर औने-पौने दामों पर खरीदा था। ईडी जांच में पता चला कि मिलों का बाजार मूल्य कई गुना अधिक था। इन्हें खरीदने के लिए वीके हेल्थ सॉल्यूशंस से असुरक्षित ऋण का लेन-देन दर्शाया गया था।

कभी जनपद की औद्योगिक पहचान और किसानों की आय का मुख्य जरिया रही शाहगंज की चीनी मिल अब खंडहर के सिवा कुछ भी नहीं है। आजादी से करीब डेढ़ दशक पूर्व वर्ष 1933 में नगर के फैजाबाद मार्ग पर स्थापित रत्ना शुगर के नाम से स्थापित यह पूर्वांचल की पहली चीनी मिल थी। इससे जहां एक ओर क्षेत्र का गौरव बढ़ा।

1932 में स्थापित रत्ना शुगर मिल सिर्फ 9.75 करोड़ रुपये में ही बेच दी गई थी। इस मिल की उस वक्त कीमत 54 करोड़ होने के बावजूद भी अधिकारियों ने खेल किया। 84 साल बाद भी जिले के गन्ना किसानों को भाजपा सरकार से एक बार फिर इस चीनी मिल को चलाने की आस जगी है।

वाराणसी के चार व्यापारी बंधुओं द्वारा वर्ष 1932 में स्थापित रत्ना शुगर मिल को मालिकों द्वारा घाटा दिखाकर बंद किया गया था। 1989 में प्रदेश सरकार ने मिल का अधिग्रहण करके रत्ना शुगर मिल से उत्तर प्रदेश राज्य चीनी मिल निगम लिमिटेड कर इसे शुरू किया। लेकिन 57 साल पुरानी हो चुकी मिल की मशीनों का नवीनीकरण नहीं कराया। जिसके चलते सरकारें भी मिल संचालन में कामयाब नहीं हो सकीं और 2006 में मिल बंद हुई तो 80 स्थाई, 450 अस्थाई व 177 सीजनल कर्मचारियों के जीवन यापन का पहिया भी रुक गया।

मिल बंद होने से जौनपुर के अलावा आजमगढ़, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर में किसानों ने गन्ने की खेती बंद कर दी। 30 मार्च 2011 को चीनी मिल महज नौ करोड़ 75 लाख रुपए में बेच दी गई। आज भी मिल पर खरीददारों का सुरक्षा के लिए जवानों का पहरा है। वहीं दूसरी ओर मजदूर संघ, समाजसेवी, राजनैतिक दलों के लोग मिल को बचाने की आस में उच्च न्यायालय की शरण में हैं। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की योगी सरकार ने बंद पड़ी चीनी मिलों की जांच की बात कहकर एक बार फिर आस जगा दी थी। ईडी द्वारा मिल जब्ती करने की कार्रवाई के बाद पुन: संचालन को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

यह कार्रवाई ईडी द्वारा चीनी मिल घोटाले में की जा रही जांच का हिस्सा है। ईडी इस मामले में और भी कई लोगों से पूछताछ कर रही है।

 

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Author: fastblitz24

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