जौनपुर: फुदकती-इठलाती गौरैया तो आपने देखी होंगी। याद कीजिए, कितनी तरह की गौरैया को आपने देखा है। पड़ गए न चक्कर में। पूरे देश में गौरैया की आठ प्रजातियां हैं। इनमें से उत्तर प्रदेश में दो प्रजातियों की गौरैया का बसेरा है। शहरी इलाकों में तो इनकी संख्या लगातार कम हो रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इनकी चहचहाहट बरकरार है। गौरैया की घटती संख्या और उसके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल आज के दिन यानी 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है।
मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन और फसलों में कीटनाशकों के बढ़ता प्रयोग गौरैया के लिए चिंताजनक है। विशेषज्ञ कहते हैं इससे इनकी अंडे देने की क्षमता कम होती है। सरकार के साथ तमाम संगठन और जीव प्रेमी पक्षियों के संरक्षण के लिए प्रयासरत हैं। पक्षी दो तरह के होते हैं। एक जो जंगलों में रहते हैं और दूसरे जो इंसानों के आसपास रहते हैं। दोनों ही तरह के पक्षियों के कम होने की सबसे बड़ी वजह उनके घरों का उजड़ना है। जंगलों में इंसानों की आवाजाही से और शहरों में लगातार पक्के घरों के निर्माण से पक्षियों के सामने अपने घर बचाने का संकट है। हालांकि, गौरैया की बात करें तो प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में इनकी संख्या स्थिर है, क्योंकि वहां उन्हें घोंसले बनाने और खाने-पीने में समस्या नहीं आती

गौरैया देश में जंगली पक्षी मानी जाती है। हालांकि यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची में शामिल नहीं है। यानी कि इसे संकटग्रस्त नहीं माना जाता। इसे केवल कानूनी रूप से संरक्षित किया गया है। इसलिए इसका शिकार करना, पकड़ना, बेचना या पालना गैरकानूनी है। गौरैया के घोंसले और अंडों को नुकसान पहुंचाना या नष्ट करना दंडनीय अपराध है। ऐसा करने पर जुर्माना और जेल भी हो सकती है। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो इसके व्यापार और शिकार की निगरानी करता है।
सरकार और कई संगठन गौरैया के संरक्षण के लिए प्रयास कर रहे हैं। लोगों को जागरूक किया जा रहा है और उन्हें गौरैया के लिए घोंसले और दाना-पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

Author: fastblitz24



