नई दिल्ली– वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक 2025 को आज संसद में पेश किए जाने से पहले ही देशभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस विधेयक के खिलाफ कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। वहीं, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनसेना पार्टी सहित कई सहयोगी दलों ने इसका समर्थन किया है।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने बुधवार को संसद के बाहर काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया और ‘वक़्फ़ बिल को अस्वीकार करें’ लिखे पोस्टर के साथ अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे अल्पसंख्यक समुदाय को नुकसान पहुंचेगा।

जनसेना पार्टी ने विधेयक के समर्थन की घोषणा की है। पार्टी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने अपने सांसदों को निर्देश दिया है कि वे विधेयक के पक्ष में मतदान करें। पार्टी ने इसे मुस्लिम समुदाय के लिए ‘लाभकारी’ बताया है और कहा कि यह वक़्फ़ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन में मदद करेगा।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि कुछ नेता और धार्मिक समूह मासूम मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल इस विधेयक का विरोध केवल अपने ‘वोट बैंक’ की राजनीति के लिए कर रहे हैं, जबकि निजी तौर पर वे इसकी आवश्यकता स्वीकार करते हैं।
विपक्षी दलों ने भाजपा की सहयोगी पार्टियों, जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) और टीडीपी (तेलुगु देशम पार्टी) को चेतावनी दी है कि यदि वे इस विधेयक का समर्थन करते हैं तो उन्हें भविष्य में इसके परिणाम भुगतने होंगे। जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर जेडीयू और टीडीपी इसका समर्थन नहीं करते, तो सरकार इस विधेयक को पारित नहीं करा सकेगी।
शिवसेना (यूबीटी) नेता शाइना एनसी ने इस विधेयक को ‘पारदर्शिता लाने वाला कानून’ बताया, जबकि आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे ‘असंवैधानिक’ करार दिया और कहा कि उनकी पार्टी इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी।
वक़्फ़ संशोधन विधेयक 2025 का उद्देश्य 1995 के वक़्फ़ अधिनियम में बदलाव करना है, जिससे वक़्फ़ संपत्तियों का प्रबंधन बेहतर हो सके। सरकार का कहना है कि यह संशोधन वक़्फ़ बोर्ड की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। इसमें वक़्फ़ संपत्तियों की परिभाषा को अद्यतन करने, उनके पंजीकरण की प्रक्रिया को सुगम बनाने और डिजिटल तकनीक का उपयोग करने जैसे बदलाव शामिल हैं।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाता है और संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध है। उनका आरोप है कि सरकार इस कानून के जरिए वक़्फ़ संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करना चाहती है।
सरकार ने विधेयक को आज लोकसभा में पेश करने की योजना बनाई है, जिसके बाद इस पर आठ घंटे की चर्चा होने की संभावना है। बहुमत के आधार पर विधेयक को पारित कराने की तैयारी की जा रही है।
अब यह देखना होगा कि संसद में इस विधेयक को समर्थन मिलता है या विपक्षी विरोध के कारण इसे वापस भेजा जाता है।

Author: fastblitz24



