जौनपुर : (केराकत) इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जौनपुर के केराकत में एक पत्रकार पर पुलिस द्वारा दर्ज किए गए कथित फर्जी मुकदमे को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने माना कि यह मुकदमा प्रताड़ना और द्वेष की भावना से दर्ज किया गया था। इस फैसले को ‘कलम की जीत’ बताया जा रहा है, क्योंकि पत्रकार ने गौशाला की बदहाल व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।

क्या था मामला?


दरअसल, पत्रकार विनोद और उनके साथियों ने अपनी लेखनी के माध्यम से एक अस्थाई गौशाला की अवस्था पर कई सवाल उठाए थे। इसके जवाब में, पुलिस ने पत्रकार पर वसूली समेत पांच गंभीर धाराओं में एक मुकदमा दर्ज कर दिया था। पत्रकार का आरोप था कि उन्हें गौशाला की सच्चाई दिखाना भारी पड़ गया था और पुलिस ने बदले की भावना से यह कार्रवाई की।
पत्रकार ने इस ‘फर्जी’ मुकदमे के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लंबी सुनवाई के बाद, हाई कोर्ट ने माना कि मुकदमे का कारण प्रताड़ना और द्वेष है। कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए मुकदमे को रद्द कर दिया और अब पुलिस से इस मामले में आख्या रिपोर्ट भी मांगी है।
फैसले के बाद पत्रकार ने कहा कि उन्हें संविधान और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। उन्होंने यह भी बताया कि वह अब इन अधिकारियों के खिलाफ हाई कोर्ट में मानहानि का दावा करेंगे। यह मामला पुलिस और पत्रकारिता के बीच संबंधों पर एक बार फिर बहस छेड़ सकता है।
Author: fastblitz24



