नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग देश भर में मतदाता सूची को पूरी तरह से पारदर्शी और शुद्ध बनाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है। **विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR)** नामक इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में कोई त्रुटि न हो और किसी भी विदेशी नागरिक का नाम गलती से भी शामिल न हो जाए। बिहार में हाल ही में ऐसे कुछ मामले सामने आने के बाद, चुनाव आयोग ने इस राष्ट्रव्यापी पहल को आवश्यक माना है, क्योंकि दो दशक पहले इस तरह का अंतिम व्यापक अभियान चलाया गया था।

चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे इस महत्वपूर्ण अभियान की तैयारी करें। इसका मुख्य लक्ष्य उन विसंगतियों को दूर करना है जो समय के साथ मतदाता सूचियों में आ गई हैं। बिहार में चलाए गए इसी तरह के अभियान के दौरान, विशेष रूप से सीमांचल जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में, मतदाता सूची में कुछ विदेशी नागरिकों के नाम पाए गए थे। यह देखते हुए कि देश में आखिरी बार इस तरह का गहन पुनरीक्षण लगभग दो दशक पहले, यानी 2002 में, राजस्थान जैसे राज्यों में हुआ था, वर्तमान परिस्थितियों में एक नए और व्यापक अभियान की आवश्यकता महसूस की गई है। चुनाव आयोग का मानना है कि इससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता और भी बढ़ेगी, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जनता का विश्वास मजबूत होगा।
पूरा पढ़िए… ????


चुनाव आयोग ने सीईओ को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि अभियान पूरा होने के बाद अंतिम विशेष पुनरीक्षण सूची आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और आम जनता भी मतदाता सूची की शुद्धता को सत्यापित कर सकेगी।
‘SIR’ अभियान: क्यों है यह महत्वपूर्ण और किन राज्यों पर रहेगा विशेष ध्यान?
चुनाव आयोग का यह ‘SIR’ अभियान केवल त्रुटियों को दूर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व भी है। इसका उद्देश्य न केवल फर्जी मतदान को रोकना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि केवल योग्य भारतीय नागरिक ही मतदान प्रक्रिया का हिस्सा बनें। इस अभियान में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे, जिससे नए और योग्य मतदाताओं को आसानी से सूची में जोड़ा जा सके और मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें
Author: fastblitz24



