जौनपुर। मानसून के मौजूदा मौसम में जौनपुर के किसानों के लिए कद्दूवर्गीय सब्जियों जैसे करेला, नेनुआ, लौकी और खीरा की खेती में मचान विधि बेहद फायदेमंद साबित हो रही है। इसी के मद्देनजर, उद्यान विभाग ने पहली बार मचान विधि से सब्जी की खेती को बढ़ावा देने के लिए इसे मिशन योजना में शामिल किया है।

जिला उद्यान अधिकारी, जौनपुर, डॉ. सीमा सिंह राणा ने बताया कि जनपद को इस योजना के तहत 4000 हेक्टेयर का लक्ष्य (3000 हेक्टेयर सामान्य और 1000 हेक्टेयर अनुसूचित जाति के किसानों के लिए) आवंटित किया गया है। डॉ. राणा ने किसानों से अपील की है कि वे इस आधुनिक विधि को अपनाकर न केवल अपनी उपज में वृद्धि कर सकते हैं, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता भी सुनिश्चित कर सकते हैं।
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डॉ. राणा ने समझाया कि बारिश के मौसम में कद्दूवर्गीय सब्जियों में पानी की अधिकता के कारण फसल खराब होने और फलों के सड़ने की समस्या आम है। जब पौधे जमीन पर फैलते हैं, तो फलों का सीधा संपर्क मिट्टी और अत्यधिक नमी से होता है, जिससे वे गलने लगते हैं और किसानों को भारी नुकसान होता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए मचान विधि एक प्रभावी समाधान है।
मचान तैयार करने के लिए खेत में बांस के टुकड़ों को गाड़कर उन पर लकड़ियों या सूखी टहनियों को बांधा जाता है, जिस पर सब्जियों के पौधों को चढ़ाया जाता है। मचान पर चढ़ाने से फल मिट्टी के संपर्क में नहीं आते, जिससे उनके सड़ने का खतरा खत्म हो जाता है। इसके अतिरिक्त, इस विधि से फलों को पर्याप्त हवा और धूप मिलती है, जिससे उनकी गुणवत्ता और आकार बेहतर होता है।
डॉ. सीमा सिंह राणा ने जोर दिया कि थोड़ी सी सावधानी और मचान विधि का उपयोग करके किसान वर्षा ऋतु में भी कद्दूवर्गीय सब्जियों से बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इस योजना के तहत किसानों को लागत का 50 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाएगा। यह लाभ ‘प्रथम आवक, प्रथम पावक’ के आधार पर दिया जाएगा। सभी किसान भाइयों से अनुरोध है कि वे इस वैज्ञानिक विधि को अपनाएं और अपनी फसल को सुरक्षित व लाभकारी बनाएं।
इच्छुक किसान http://dbt.uphorticulture.in/ पोर्टल पर पंजीकरण करा सकते हैं या अधिक जानकारी के लिए कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
Author: fastblitz24


