Fastblitz 24

जौनपुर की 7 राजनीतिक पार्टियों को चुनाव आयोग का नोटिस, सूची से बाहर होने का खतरा

जौनपुर: चुनाव आयोग ने उन राजनीतिक दलों पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है, जो लंबे समय से किसी भी चुनाव में सक्रिय नहीं हैं। इसी क्रम में, जौनपुर जिले की सात ऐसी पार्टियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिन्होंने पिछले छह सालों (2019-2025) में कोई चुनाव नहीं लड़ा है। अगर ये पार्टियां तय समय सीमा में जवाब नहीं दे पाती हैं, तो उन्हें राजनीतिक दलों की सूची से बाहर कर दिया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. दिनेश चन्द्र ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकृत उत्तर प्रदेश के कुल 121 अमान्यता प्राप्त राजनीतिक दल, जो 2019 से 2025 तक किसी भी चुनाव में शामिल नहीं हुए हैं, उन्हें भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली द्वारा 11 अगस्त 2025 को जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में नोटिस भेजा गया है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश ने इन दलों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

पूरा पढ़िये 👇

जौनपुर जिले की जिन सात पार्टियों को नोटिस भेजा गया है, उनकी सूची इस प्रकार है:

* युवा जनक्रांति पार्टी: कस्बा केराकत, मोहल्ला शेखजादा द्वितीय।

* सम्पूर्ण समाज पार्टी: प्र.पो. गैरवाह, थाना सरपतहां, तहसील शाहगंज।

* महाकांति दल: ग्राम अवहदपुर, पोस्ट-कोईलारी, तहसील केराकत।

* भारतीय आवाम ताकत दल: ग्राम सुजनीडीह (रामपुर), पोस्ट सोहांसा, तहसील मछलीशहर।

* बहुजन हसरत पार्टी: ग्राम खरुवावा, पोस्ट कुवरपुर, तहसील मछलीशहर।

* आदर्शवादी पार्टी (लोकतांत्रिक): मौहल्ला चित्रसारी, सदर जौनपुर।

* पूर्वांचल क्रांति पार्टी: यादवगंज, पोस्ट सिकरारा।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश, लखनऊ ने इन सभी दलों को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से नोटिस भेज दिया है।

निर्देशों के अनुसार, इन पार्टियों के अध्यक्ष या महासचिव को 21 अगस्त 2025 तक लखनऊ स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय (विकास भवन, जनपथ मार्केट) में अपना प्रत्यावेदन, हलफनामा और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होंगे।

इन दलों के प्रतिनिधियों की सुनवाई के लिए 02 और 03 सितंबर 2025 की तारीखें तय की गई हैं। यदि निर्धारित समय तक कोई भी पार्टी जवाब नहीं देती है, तो इसे उनकी मौन स्वीकृति माना जाएगा। इसके बाद, आयोग ऐसे राजनीतिक दलों को सूची से हटाने का प्रस्ताव भारत निर्वाचन आयोग को भेज देगा, जिसके बाद इनकी मान्यता समाप्त हो सकती है।

 

fastblitz24
Author: fastblitz24

Spread the love