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प्रतिबंधित कोडीन और नकली दवा के अवैध व्यवसाय पर कमान की कवायद शुरू

दवा संगठन ने कहा – जांच में हो पारदर्शिता और प्रभावी कार्यवाही

जौनपुरपिछले दिनों आगरा समेत प्रदेश की कई दवा मंडियों में भारी मात्रा में नकली दवा की बरामदगी और वहाँ से मिली गुप्त सूचनाओं के आधार पर विभाग ने जनपद में भी अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। गुप्त सूचनाओं में मिले इनपुट के आधार पर जनपद के उन व्यापारियों को खंगाला जा रहा है जिनके तार दवा मंडियों के संदिग्ध व्यापारियों से जुड़े हुए हैं। जिन्होंने बिल-वाउचर के करोड़ों रुपए की दवाएँ मार्केट में खपाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। जनपद में अब ऐसे ड्रग माफियाओं की खोजबीन शुरू हो गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जनपद में ऐसे आधा दर्जन से ज्यादा व्यापारी हैं जो जांच के निशाने पर हैं।

शासन के विशेष निर्देश पर गुप्त तरीके से शुरू हुई जाँच के बाद ऐसे व्यापारियों की पड़ताल शुरू हो गई है। इस जाँच-पड़ताल में ऐसे ड्रग माफिया शासन के रडार पर हैं, जो लंबे समय से अधोमानक और नकली दवाएँ जनपद समेत पूर्वांचल के मार्केट में खपा रहे हैं।रातों-रात लखपति बनने का ख्वाब संजोए ये ड्रग माफिया आम आदमी के जीवन के साथ तो खिलवाड़ कर ही रहे हैं, साथ ही प्रदेश सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती बन गए हैं।

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जनपद के अग्रणी दवा व्यवसाय संगठन केमिस्ट एंड फार्मेसी वेलफेयर एसोसिएशन ने इस जाँच का स्वागत करते हुए कहा है कि जाँच में पारदर्शिता होनी चाहिए और कार्यवाही प्रभावकारी होनी चाहिए। लेकिन जाँच के नाम पर भयादोहन नहीं किया जाना चाहिए। संगठन के महामंत्री राजेंद्र निगम ने कहा है कि विभाग को इसी जाँच के दौरान नशीली दवाओं, कोडीन युक्त कफ सिरप और ट्रामाडाल की अप्रत्याशित और भारी खरीद-बिक्री करने वालों को भी जाँच के दायरे में लाना चाहिए।

सहायक आयुक्त (औषधि) वाराणसी मंडल के निर्देशन में प्रारंभ हुई जाँच से दवा कारोबारियों में हड़कंप मच गया।टीम में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि इस बार की जाँच-पड़ताल जिले के ऐसे सभी थोक और फुटकर विक्रेताओं के यहां से पिछले दो वर्ष के दौरान दवाओं की खरीद-फरोख्त व उनकी बिक्री से जुड़े पूरे प्रपत्र को खंगालना मुख्य है।किस कंपनी की, कितनी गुणवत्ता वाली, कौन सी दवा कब कहाँ कैसे आई है, उसके प्रपत्र इकट्ठा करके संबंधित फर्म से भी जाँच-पड़ताल की जाएगी, जिससे यह साबित हो सके कि बाजार में बिकने वाली असली और नकली दवाओं के सप्लायर व इन्हें बनाने वाली कंपनियों के तार कहाँ और कैसे जुड़े हैं।

इस संबंध में जिला औषधि निरीक्षक रजत पांडेय ने बताया कि कई मेडिकल एजेंसियों की जाँच-पड़ताल की गई। जिसमें शहर के मिलन सुपर फार्मा, मिलन सुपर एंड कंपनी जहांगीराबाद और अग्रवाल मेडिकल एजेंसी पर गहन जाँच-पड़ताल की गई।उन्होंने बताया कि इन सभी दुकानों पर कोडीन से संबंधित दवा के बारे में जाँच-पड़ताल की गई।उन्होंने यह भी बताया कि मिलन सुपर फार्मा और अग्रवाल मेडिकल एजेंसियों से नियमानुसार तीन-तीन दवाओं का सैंपल लेकर जाँच के लिए भेज दिया गया है।रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्यवाही ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के नियमानुसार होगी।

 

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Author: fastblitz24

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