वॉशिंगटन. खगोल वैज्ञानिकों के लिए सूर्यग्रहण हमेशा में दिलचस्पी का केंद्र रहे हैं। ऐसे में बात अगर सदी से सबसे बड़े सूर्यग्रहण की तो उत्सुकता स्वाभाविक है। 2 अगस्त 2027 को धरती पर सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण होने जा रहा है। इस दौरान 6 मिनट 23 सेकंड तक ग्रहण के चलते आसमान में अंधेरा रहेगा। लेकिन इसके साथ ही एक सवाल तेजी से चर्चा में है कि क्या पूर्ण सूर्यग्रहण को पूरी धरती पर अंधेरा हो जाएगा। यह जानने के लिए हमें ग्रहण को समझना होगा कि वे कैसे काम करते है और उनकी अंधेरा करने की क्षमता क्षेत्र विशेष को कैसे प्रभावित करती है।

सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी के क्रमशः एक सीध में आने के चलते होती है। पूर्ण सूर्यग्रहण तब होता है जब चांद सीधी रेखा में सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इस संयोजन के चलते सूर्य का कोरोना चांद के पीछे छिप जाता है और पृथ्वी पर चंद्रमा की परछाई पड़ती है। इससे आसमान में शाम के समय जैसा दृश्य हो जाता है। इस परछाई को अंब्रा कहते हैं। अंब्रा काफी पतली होती है।


Author: fastblitz24



