जौनपुर: अखिल भारतीय पूर्व सैनिक संगठन, जौनपुर द्वारा राष्ट्र का 27वां और संगठन का चौथा कारगिल विजय दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों से मातृभूमि की एक-एक इंच जमीन को मुक्त कराने वाले अमर वीरों के सर्वोच्च बलिदान और अटूट राष्ट्रभक्ति को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
अदम्य साहस और शौर्य का स्वर्णिम अध्याय समारोह में वक्ताओं ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक सैन्य विजय का स्मरण नहीं है, बल्कि यह भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय शौर्य, अनुशासन और रणनीतिक कौशल का प्रतीक है।
दुर्गम परिस्थितियों में पराक्रम: शून्य से कई डिग्री नीचे तापमान, 16 से 18 हजार फीट की ऊंचाई, दुर्गम पर्वतीय चोटियां और ऑक्सीजन की कमी के बीच भारतीय सैनिकों ने असाधारण वीरता का परिचय दिया।
अमर वीरगाथाएं: टोलोलिंग, टाइगर हिल, प्वाइंट 5140, प्वाइंट 4875 और खालूबार रिज जैसी चोटियों पर रात के अंधेरे में सीधी खड़ी चट्टानों पर चढ़ाई कर वीर जवानों ने दुश्मन के मजबूत बंकरों पर कब्ज़ा किया और तिरंगा फहराया।
कारगिल के बाद रक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार कार्यक्रम के दौरान देश की रक्षा तैयारियों और सैन्य आधुनिकीकरण पर भी विस्तार से चर्चा की गई। यह रेखांकित किया गया कि कारगिल युद्ध के बाद भारत की सामरिक क्षमता को नई मजबूती मिली है:
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर संयुक्त संचालन।
सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों एवं सुरंगों का तेजी से निर्माण और आधुनिक निगरानी प्रणाली की स्थापना।
‘आत्मनिर्भर भारत’ के अंतर्गत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा।
शांति और सुरक्षा के प्रति भारत के दृढ़ संकल्प के रूप में सर्जिकल स्ट्राइक (2016), बालाकोट एयर स्ट्राइक (2019) और ऑपरेशन सिंदूर (2025) जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं।
शहीदों का बलिदान देश के लिए शाश्वत प्रकाशस्तंभ: कैप्टन अजीत पाण्डेय अखिल भारतीय पूर्व सैनिक संगठन, जौनपुर के संरक्षक कैप्टन अजीत पाण्डेय ने उपस्थित शहरवासियों और पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि कारगिल केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रवाद और देशभक्ति की अमर विरासत है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा, “समय बीत सकता है, युद्ध समाप्त हो सकते हैं, लेकिन मातृभूमि की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वीरों का साहस कभी समाप्त नहीं होता।” कैप्टन पाण्डेय ने राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और संप्रभुता की रक्षा के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि अमर बलिदानियों की वीरता आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव ‘सेवा परमो धर्मः’ की प्रेरणा देती रहेगी।




