हस्तशिल्प सेवा केंद्र वाराणसी की पहल, लाइव डेमो के जरिए छात्रों को पारंपरिक शिल्प और स्वरोजगार से जोड़ने की कोशिश
जौनपुर | भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय (कार्यालय विकास आयुक्त – हस्तशिल्प) के अधीन संचालित हस्तशिल्प सेवा केंद्र, वाराणसी के सौजन्य से सोमवार को बदलापुर स्थित सल्तनत बहादुर पीजी कॉलेज में तीन दिवसीय ‘शिल्प प्रदर्शन सह जागरूकता कार्यक्रम’ का भव्य शुभारंभ किया गया। 27 से 29 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत से जोड़ना और स्वरोजगार के प्रति प्रेरित करना है।
चार प्रमुख पारंपरिक शिल्पों का लाइव प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान देश के सिद्धहस्त शिल्पियों द्वारा छात्र-छात्राओं के समक्ष लाइव डेमो (जीवंत प्रदर्शन) दिया जा रहा है, जिससे वे निर्माण की बारीकियों को समझ सकें:
कढ़ाई शिल्प: जे.बी. अख्तर
जरी-जरदोजी: अफसाना बानो
टेराकोटा (मिट्टी के बर्तन/शिल्प): दिनेश प्रजापति
मूंज शिल्प: दिनेश कुमार
ये मास्टर शिल्पकार अगले तीन दिनों तक कलाकृतियों के निर्माण, उनकी उपयोगिता, बाजार में विपणन (मार्केटिंग) और इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता व स्वरोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से मार्गदर्शन करेंगे।
”इस तरह के आयोजन युवा पीढ़ी में भारतीय संस्कृति और हस्तशिल्प के संरक्षण, संवर्धन और आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होंगे।”
— प्रो. अखण्ड प्रताप सिंह, प्राचार्य (सल्तनत बहादुर पीजी कॉलेज)
कार्यक्रम में प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अखण्ड प्रताप सिंह के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों व विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस मौके पर मुख्य रूप से:
विभागीय व संस्थागत अतिथि: भवानी प्रसाद (कालीन प्रशिक्षण अधिकारी) एवं डॉ. अंजू रानी सिंह (सचिव, ठाकुरबाड़ी महिला विकास कल्याण समिति)।
महाविद्यालय परिवार: डॉ. बृजेश मिश्र, डॉ. ओम प्रकाश सिंह, डॉ. विनय दुर्गेश शर्मा, डॉ. पूनम श्रीवास्तव, डॉ. रेखा मिश्रा, डॉ. रागिनी सिंह, डॉ. शशिकला सिंह सहित अनेक प्राध्यापक व कर्मचारी उपस्थित रहे।




