नई दिल्ली: वक्फ संशोधन विधेयक आज दोपहर 1 बजे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। इससे पहले, कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की बैठक संविधान सदन (पुरानी संसद) में हुई, जिसमें कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस विधेयक को जबरन लोकसभा से पारित कराया है, जो कि संविधान पर सीधा हमला है।
सोनिया गांधी ने कहा, “यह विधेयक भारतीय समाज को स्थायी रूप से विभाजित करने की भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। मोदी सरकार देश को रसातल में ले जा रही है और संविधान को केवल कागजों तक सीमित करना चाहती है। वन नेशन-वन इलेक्शन विधेयक भी संविधान का उल्लंघन है, जिसका हम पुरजोर विरोध करेंगे।

बुधवार को लोकसभा में 12 घंटे तक चली गहन बहस के बाद देर रात 2 बजे मतदान हुआ, जिसमें 520 सांसदों ने भाग लिया। इनमें से 288 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 232 ने विरोध में मतदान किया। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे ‘यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट’ (UMMEED) नाम दिया है।
चर्चा के दौरान AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विरोधस्वरूप विधेयक की प्रति फाड़ दी। उन्होंने कहा, “इस विधेयक का उद्देश्य केवल मुसलमानों को अपमानित करना है। यह लोकतंत्र की हत्या करने का प्रयास है।”
गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “इस विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो वक्फ संपत्तियों पर गैर-इस्लामिक दखल को अनुमति देता हो। यह विधेयक चोरी के लिए नहीं, बल्कि गरीबों के हक की रक्षा के लिए लाया गया है।”
विधेयक को लेकर संसद में गरमागरम बहस
संसद में विधेयक को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
रिजिजू बोले: “यदि यह विधेयक नहीं लाया जाता, तो संसद भवन पर भी वक्फ संपत्ति का दावा किया जा सकता था।”
अखिलेश यादव का तंज: “सरकार चीन के अतिक्रमण पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन वक्फ की जमीन पर विधेयक ला रही है।”
अनुराग ठाकुर ने कहा: “भारत में अंबेडकर का संविधान चलेगा, मुगलिया फरमान नहीं।”
राजीव रंजन सिंह (JDU): “यह विधेयक मुस्लिम विरोधी नहीं है, बल्कि सभी वर्गों के लिए न्यायसंगत है।”
नए संशोधनों के तहत वक्फ संपत्तियों की पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
गैर-मुस्लिमों को भी वक्फ बोर्ड में शामिल किए जाने का प्रावधान रखा गया है।
अवैध रूप से घोषित वक्फ संपत्तियों पर पुनर्विचार की प्रक्रिया तय की गई है
लोकसभा में बहुमत से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश होगा। जहां विपक्ष इसे रोकने की पूरी कोशिश करेगा, वहीं सरकार इसे पारित कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है। राज्यसभा में सरकार के पास पर्याप्त संख्याबल होने के बावजूद विपक्ष के विरोध से इस पर बहस के दौरान गरमागरम माहौल देखने को मिल सकता है।

Author: fastblitz24



