’ऐ हुसैन अलविदा’ की सदाओं से नम हुईं आंखें, चमत्कारिक ताज़िया व तुरबत सुपुर्दे-ख़ाक; दहकती आग की ज़ंजीरों पर हुआ मातमी जुलूस

(न्यूज़ डेस्क)
जौनपुर, 03 अगस्त 2026:
आंखों में आंसू, लबों पर ‘या हुसैन’ की सदा और दहकते अंगारों पर आस्था का मातम — जानिए क्यों पूरे देश से एक दिन पहले जौनपुर में उमड़ता है चमत्कारी ताज़िया और मन्नती नेबू का यह ऐतिहासिक जन-सैलाब!”
‘शीराज़े-हिंद’ के नाम से विश्वविख्यात ऐतिहासिक नगर जौनपुर में सोमवार को पारंपरिक चेहल्लुम का जुलूस अत्यंत ग़मगीन माहौल और पूर्ण शांति व्यवस्था के साथ संपन्न हुआ। इमाम हुसैन और उनके वफ़ादार साथियों की शहादत की याद में आयोजित इस मजलिस व जुलूस में देश के कोने-कोने से आए हज़ारों श्रद्धालुओं (मोमनीन) का अपार जन-सैलाब उमड़ पड़ा।

मजलिस, सोज़ख़्वानी और मन्नती नेबू का दृश्य
सोमवार दोपहर एक बजे इमामबाड़ा शेख़ मोहम्मद इस्लाम से कार्यक्रम का आगाज़ मजलिस, सोज़ख़्वानी और मुफ़्ती शारिब मेहंदी की मरसियाख़्वानी से हुआ। फैज़ाबाद से आए विख्यात मौलाना सैयद नदीम रज़ा ज़ैदी ने जब करबला के मसायब (दुखों) का बयान किया, तो पूरा प्रांगण ‘या हुसैन’ की आंसुओं भरी सदाओं से गूंज उठा।
मजलिस के बाद जैसे ही ऐतिहासिक व मोजिज़ी (चमत्कारिक) तुरबत निकाली गई, मन्नती नेबू चढ़ाने और उतारने के लिए महिलाओं और पुरुषों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसके उपरांत अंजुमनों ने नौहाख़्वानी और सीनाज़नी करते हुए जुलूस को आगे बढ़ाया।
शब्बेदारी और आग से दहकती ज़ंजीरों का मातम
इससे पूर्व, रविवार रात को इस्लाम चौक पर ताज़िया रखकर शब्बेदारी की शुरुआत की गई। डॉ. कमर अब्बास ने मजलिस को संबोधित किया, जिसके बाद विभिन्न अंजुमनों ने रात भर अनवरत नौहाख़्वानी और मातम किया। सोमवार भोर में पांच बजे बेलाल हसनैन की अलविदाई मजलिस के पश्चात ‘अंजुमन गुलशने इस्लाम (रजि.)’ के अज़ादारों ने आग से दहकती हुई ज़ंजीर से रोंगटे खड़े कर देने वाला मातम प्रस्तुत किया।
देश भर के चेहल्लुम से एक दिन पहले मनाने की परंपरा
जौनपुर के इस चेहल्लुम की विशेष ऐतिहासिक पहचान यह है कि इसे पूरे देश में मनाए जाने वाले चेहल्लुम से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। इसी अनूठी और प्राचीन परंपरा के कारण हर वर्ष यहाँ देश के अलग-अलग हिस्सों से हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु (महिलाएं, पुरुष और बच्चे) अपनी मन्नतें मांगने और अकीदत पेश करने पहुँचते हैं।
बेगमगंज सदर इमामबाड़े पर समापन
बाज़ार भुआ, मुल्लाटोला और पुरानी बाज़ार जैसे कदीम (पारंपरिक) रास्तों से होता हुआ यह जुलूस बेगमगंज स्थित सदर इमामबाड़ा पहुँचा। यहाँ ‘ऐ हुसैन अलविदा’ की पुरनम पुकार के साथ सभी ताज़िये और तुरबत सुपुर्दे-ख़ाक किए गए।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति व आभार
कार्यक्रम के सफल संचालन में सैयद कबीर ज़ैदी, एडवोकेट सैयद अकबर हुसैन ज़ैदी और अबू तालिब ज़ैदी की मुख्य भूमिका रही।
- आभार व्यक्त किया: मोतवल्ली सैयद ज़ाफ़र हसन ज़ैदी करबलाई और कार्यकारी मुतवल्ली लाडले ज़ैदी ने आए हुए सभी मोमनीन का धन्यवाद किया।
- प्रमुख उपस्थिति: पूर्व एमएलसी हाजी सिराज मेहंदी, मौलाना सैयद सफ़दर हुसैन ज़ैदी, ज़मीर ज़ैदी, शाहिद ज़ैदी, सीए मीसम ज़ैदी, साजिद हैदर, आरिफ़ जाफ़री, मुख्तार मोहसिन सहित हज़ारों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पूरे कार्यक्रम का इंतज़ाम मीर मुज़फ़्फ़र हुसैन ज़ैदी के परिजनों और इंतज़ामिया कमेटी द्वारा संभाला गया, जिन्होंने बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के लिए ज़िला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया।





