UKG से शुरू की थी एबेकस की ट्रेनिंग; जानिए कैसे यह प्राचीन कला बच्चों में बढ़ाती है स्मरण शक्ति, स्पीड और एकाग्रता
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कैलकुलेटर से भी तेज दिमाग! लुधियाना की 7 साल की निहारिका उंगलियों के इशारे पर सेकंडों में सुलझाती हैं गणित की सबसे मुश्किल पहेलियां।
लुधियाना/मुंबई
लुधियाना की 7 साल की निहारिका गुप्ता ने नेशनल लेवल पर शहर और पंजाब का नाम रोशन किया है। 2nd क्लास में पढ़ने वाली निहारिका ने मुंबई में 5 सितंबर को आयोजित ‘नेशनल एबेकस कॉम्पिटिशन’ के लेवल B1 में 5वां रनर-अप (5th Position) स्थान हासिल किया है।
देशभर के प्रतिभावान बच्चों के बीच निहारिका ने अपनी स्पीड, सटीक कैलकुलेशन और एकाग्रता के दम पर यह मुकाम पाया। जीत की खबर मिलते ही परिवार और स्कूल में जश्न का माहौल है।
UKG से शुरू हुआ मेंटल मैथ्स का सफर
निहारिका ने बेहद कम उम्र (UKG) में ही एबेकस सीखना शुरू कर दिया था। रोज के निरंतर अभ्यास से उसने मानसिक गणित (Mental Mathematics) पर अपनी पकड़ मजबूत की। बिना कागज-पेन के सेकंडों में बड़ी-बड़ी गणनाएं कर लेना उसकी सबसे बड़ी खासियत है।
अचीवमेंट ग्राफ:
- नेशनल लेवल (2026): मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लेवल B1 में 5th रनर-अप।
- स्टेट लेवल: लगातार पिछले 2 सालों से राज्य स्तरीय एबेकस अवॉर्ड अपने नाम कर रही हैं।
एक्सपर्ट टेक: जानिए क्यों जरूरी है बच्चों के लिए एबेकस?
एबेकस विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ तेजी से मैथ्स सॉल्व करने का जरिया नहीं है, बल्कि यह बच्चों के ओवरऑल ब्रेन डेवलपमेंट में मदद करता है:
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- 360° मेंटल ग्रोथ: इससे बच्चों की एकाग्रता, मेमोरी पावर, विज़ुअलाइज़ेशन और लिसनिंग स्किल्स बेहतर होते हैं।
- कॉन्फिडेंस और पेशेंस: जब बच्चे फिजिकल एबेकस से मेंटल कैलकुलेशन पर शिफ्ट होते हैं, तो उनका सेल्फ-कॉन्फिडेंस और प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी काफी बढ़ जाती है।
प्रेरणा: निहारिका की यह सफलता साबित करती है कि अगर सही उम्र में स्किल-बेस्ड लर्निंग दी जाए, तो छोटे बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा कमाल कर सकते हैं।




