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आस्था और सेवा की मिसाल: 54 वर्षों से निरंतर मां की आराधना में समर्पित ‘गीतांजलि संस्था’ का अद्भुत स्वर्ण रथ
जौनपुर:
जौनपुर में शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा महोत्सव का उल्लास किसी एक कोने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा जनपद नौ दिनों तक मां की भक्ति में सराबोर नजर आता है। शहर से लेकर गांव-गांव तक भव्य पंडाल सजते हैं, जहाँ मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है। इन नौ दिनों के दिव्य उत्सव के बाद, विजयदशमी के पावन पर्व पर निकलने वाली भव्य शोभायात्रा और आदि गंगा गोमती के तट पर स्थित कुंड में मां का विसर्जन इस महोत्सव का सबसे भावुक और मुख्य आकर्षण होता है।
इस बार इस ऐतिहासिक विसर्जन यात्रा और शोभायात्रा को और भी अधिक भव्य, अलौकिक और यादगार बनाने जा रही है नगर की प्रतिष्ठित सामाजिक व पारिवारिक संस्था—गीतांजलि।
इस बार क्या रहेगा खास?
- स्वर्ण रथ पर सवार मां भगवती: अपनी स्थापना के 54 वर्ष पूरे कर चुकी और इस वर्ष अपना 50वां उत्सव मना रही गीतांजलि संस्था ने इस बार मां भगवती को (फाइन गोल्ड 999.9) सोने के रथ पर सवार कर शोभायात्रा और विसर्जन के लिए निकालने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
- पूरी रात जागते हैं श्रद्धालु: गीतांजलि परिवार की आकर्षक सजावट और भव्य शोभायात्रा को देखने के लिए सैकड़ों-हजारों दर्शनार्थी पूरी रात जागकर शोभा स्थल से लेकर विसर्जन घाट तक जमे रहते हैं।
- ऐतिहासिक परंपरा का विस्तार: हर साल अपनी अनूठी शोभायात्रा के लिए पहचानी जाने वाली यह संस्था इस स्वर्ण जयंती वर्ष में परंपरा और आधुनिकता का ऐसा संगम पेश कर रही है, जो जौनपुर के दुर्गा पूजा इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।
आदि गंगा गोमती के तट पर होने वाले इस बार के विसर्जन में सोने के रथ पर सवार मां की विदाई का दृश्य देखने के लिए न सिर्फ जौनपुर बल्कि दूर-दराज से भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।
Fast Blitz 24 डिजिटल डेस्क
जौनपुर से ब्यूरो रिपोर्ट




