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दवा आयात पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला: अब देश में नहीं आ पाएंगी एक्सपायरी के करीब पहुंच चुकी विदेशी दवाएं, नियम सख्त

स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में किया संशोधन; सामान्य दवाओं के लिए कम से कम 1 साल की शेल्फ लाइफ अनिवार्य, जैविक दवाओं और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के लिए 60% नियम लागू।
नई दिल्ली / फास्ट ब्लिट्ज 24 ब्यूरो
भारत सरकार ने देश में आयात होने वाली विदेशी दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर एक कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब देश में उन दवाओं के आयात पर पूरी तरह शिकंजा कसने जा रहा है जो अपनी एक्सपायरी डेट के बेहद करीब हैं। केंद्र सरकार ने औषधि नियम, 1945 (Drugs Rules, 1945) के नियम 31 में बड़ा संशोधन करते हुए नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं।
इस नए बदलाव के बाद अब कोई भी कंपनी या आयातक ऐसी सामान्य दवाओं को भारत में आयात नहीं कर सकेगा, जिनकी उपयोग अवधि (Expiry Period) आयात के समय एक साल से कम बची हो। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली और पूरी शेल्फ लाइफ वाली सुरक्षित दवाएं उपलब्ध कराना है।
अब क्या होंगे नए नियम? (प्रमुख बिंदु)
- सामान्य दवाओं के लिए 1 साल की अनिवार्यता: नए प्रावधानों के तहत, सामान्य दवाओं के आयात के समय यह अनिवार्य कर दिया गया है कि उनकी एक्सपायरी में कम से कम 365 दिन (एक साल) का समय शेष होना चाहिए। यदि दवा की शेल्फ लाइफ इससे कम है, तो उसे भारत में आयात की मंजूरी नहीं मिलेगी।
- जैविक (Biological) और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स दवाओं के लिए राहत: सरकार ने कुछ विशेष श्रेणी की दवाओं की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए उनमें आंशिक छूट का प्रावधान किया है। जैविक दवाओं और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के मामले में, यदि उनके लेबल पर दर्ज कुल उपयोग अवधि का कम से कम 60 प्रतिशत समय शेष है, तो उन्हें आयात की अनुमति दी जा सकती है।
- जनता और विशेषज्ञों की सलाह पर लगी मुहर: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा उठाए गए इस कदम से पहले औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) से विस्तृत परामर्श किया गया था। इसके साथ ही, आम जनता और चिकित्सा विशेषज्ञों से मिले सुझावों पर गहन विचार-विमर्श के बाद इन संशोधनों को अंतिम रूप दिया गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता और सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सख्त नीति से देश के फार्मास्युटिकल बाजार में उन विदेशी कंपनियों पर लगाम लगेगी जो अपनी पुरानी या एक्सपायरी के करीब आ चुकी इन्वेंट्री को भारतीय बाजारों में खपाने की कोशिश करती हैं। इससे न केवल मरीजों की सेहत से खिलवाड़ रुकेगा, बल्कि देश में हेल्थकेयर स्टैंडर्ड्स को भी एक नया आयाम मिलेगा।
Fast Blitz 24 Insight: सरकार का यह फैसला घरेलू दवा उद्योग को मजबूती देने और मरीजों के स्वास्थ्य हितों की रक्षा की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि आयातक और विदेशी फर्में इस नए एक-वर्षीय समय-सीमा के नियम का किस प्रकार पालन करती हैं।




