शिक्षा प्रदर्शनी में गूंजा किताबों का महत्व, चार शोधपरक पुस्तकों का लोकार्पण
इडुनिक पब्लिकेशन के कार्यक्रम में जुटे दिग्गज शिक्षाविद्, बोले- एआई से नहीं मिल सकते संस्कार
जौनपुर |
नईगंज स्थित इडुनिक पब्लिकेशन एंड रिसर्च सेंटर की ओर से आयोजित दो दिवसीय बाल शिक्षा प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर इडुनिक पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित चार महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया, जिसमें शिक्षा, मनोविज्ञान और बाल विकास जैसे विषयों को गहराई से समेटा गया है।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि मणिपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो-वीसी प्रो. अजय कुमार चतुर्वेदी और सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. मोतीलाल गुप्त ने दीप प्रज्वलित कर किया। प्रदर्शनी में बच्चों की शिक्षा से जुड़े विभिन्न आयामों को प्रदर्शित किया गया है। इस दौरान 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों को अतिथियों द्वारा कॉपी-कलम भेंट कर प्रोत्साहित किया गया।
संस्कारों के लिए पुस्तकें अनिवार्य
एनएसएस समन्वयक प्रो. राजबहादुर यादव ने कहा कि एआई और डिजिटल क्रांति के दौर में भी पुस्तकों की उपयोगिता खत्म नहीं हुई है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद जानकारी का मूल स्रोत भी किताबें ही हैं। पूर्व समन्वयक प्रो. राकेश कुमार यादव ने जोर देते हुए कहा कि एआई बच्चों में संस्कार विकसित नहीं कर सकता, इसके लिए माता-पिता और किताबों की भूमिका अनिवार्य है।

भावनात्मक विकास में तकनीक बाधा
अध्यक्षता कर रहे प्रो. मोतीलाल गुप्त ने आगाह किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों के भावनात्मक विकास में बड़ी बाधा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह शारीरिक और मानसिक विकास जरूरी है, उसी तरह भावनात्मक मजबूती के लिए परिवार और परिवेश का साथ आवश्यक है। पीयू के डीन प्रो. अजय दुबे ने कहा कि तकनीक कभी भी प्रत्यक्ष शिक्षा का स्थान नहीं ले सकती।

इन पुस्तकों का हुआ विमोचन
विमोचन के दौरान डॉ. अरविंद कुमार यादव द्वारा लिखित ‘शैक्षिक दर्शन’, ‘शैक्षिक मनोविज्ञान’ व ‘बाल्यावस्था एवं उसका विकास’ तथा डॉ. उमेंद्र कुमार द्वारा लिखित ‘इक्कीसवीं सदी में शिक्षा’ का लोकार्पण किया गया। प्रबंधक विकास यादव ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर डॉ. सुरेश चंद्र मौर्य, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. अमित गुप्ता सहित भारी संख्या में शिक्षाविद् मौजूद रहे।


Author: fastblitz24




