प्रायोगिक परीक्षक नियुक्ति व यात्रा भत्ता में समान नीति की मांग
शिक्षक संघ ने परीक्षा नियंत्रक व वित्त अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, नीतियों पर उठाए सवाल
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पूर्ण स्ववित्तपोषित महाविद्यालय शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली और भेदभावपूर्ण नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिक्षकों का आरोप है कि प्रायोगिक परीक्षाओं और मानदेय भुगतान में उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। गुरुवार को संघ के अध्यक्ष डॉ. विवेक पाण्डेय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह और वित्त अधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
मूल्यांकन का बोझ हमारा, प्राथमिकता दूसरों को: डॉ. विवेक
संघ के अध्यक्ष डॉ. विवेक पाण्डेय ने तीखे शब्दों में कहा कि प्रायोगिक और मौखिकी परीक्षाओं में परीक्षक नियुक्ति को लेकर दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मूल्यांकन में 95 प्रतिशत से अधिक भागीदारी स्ववित्तपोषित शिक्षकों की होती है, जिसके दम पर विश्वविद्यालय समय से परिणाम घोषित कर पाता है। विडंबना यह है कि मूल्यांकन कार्य स्ववित्तपोषित शिक्षकों के लिए अनिवार्य है, जबकि अनुदानित और राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों को इससे छूट दी गई है। इसके बावजूद प्रायोगिक परीक्षाओं में स्ववित्तपोषित शिक्षकों की अनदेखी की जा रही है।


यात्रा भत्ता भुगतान में भेदभाव का आरोप
शिक्षकों ने यात्रा भत्ता (TA) भुगतान में भी विसंगतियों का मुद्दा उठाया। संघ का कहना है कि जिस शासनादेश के हवाले से भुगतान किया जा रहा है, वह स्ववित्तपोषित शिक्षकों पर लागू ही नहीं होता। विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के तहत यात्रा भत्ता निर्धारण का अधिकार कार्यपरिषद (EC) को है, लेकिन इस विषय को आज तक कार्यपरिषद की बैठक में रखा ही नहीं गया।
दूरी के निर्धारण पर भी सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने ध्यान दिलाया कि केंद्रीय मूल्यांकन के लिए अधिकतम 200 किलोमीटर की दूरी तय है, लेकिन प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए 500 से 700 किलोमीटर दूर के शिक्षकों को परीक्षक बनाया जा रहा है। इससे न केवल शिक्षकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, बल्कि लंबी दूरी के कारण परिणाम घोषित करने में भी अनावश्यक देरी हो रही है।
जल्द समाधान का आश्वासन
परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने शिक्षकों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि इन मांगों को जल्द ही उच्चाधिकारियों और सक्षम समिति के समक्ष रखा जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने साफ किया कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे लोकतांत्रिक ढंग से अपनी आवाज बुलंद करने को मजबूर होंगे।


Author: fastblitz24



