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जौनपुर: ट्रिपल इंजन सरकार में ‘धुआं-धुआं’ हुई सफाई व्यवस्था, 10 से 12 के बीच शहर का निकलता है कचरा और दम

 

जौनपुर | विशेष संवाददाता

​कहने को तो प्रदेश में ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार है, लेकिन जौनपुर नगर पालिका की कार्यप्रणाली ने इस इंजन को पटरी से उतार दिया है। शहर की सफाई व्यवस्था वर्तमान में पूरी तरह ‘राम भरोसे’ है। नालियां बजबजा रही हैं, सड़कों पर कूड़े के पहाड़ हैं और ताज्जुब की बात यह है कि इस कचरे के निस्तारण के नाम पर जिम्मेदार चुपचाप इसमें आग लगवा देते हैं, जिससे पूरा शहर जहरीले धुएं की चपेट में है।

पीक ऑवर्स में सफाई का ‘तमाशा’: जब ऑफिस-स्कूल का समय, तब सड़कों पर कचरा

​नगर पालिका परिषद की कार्यशैली का सबसे अजीब पहलू इसका समय है। जब सुबह 9 बजे पूरा शहर दफ्तर, स्कूल और व्यापार के लिए सड़कों पर निकलता है, तब पालिका का सफाई अभियान शुरू होता है। यह ‘दिखावा’ दोपहर 12 बजे तक चलता है।

  • जाम का झाम: सड़कों के बीचों-बीच कूड़ा निकालने से घंटों जाम लग रहा है।
  • राहगीरों की फजीहत: राहगीरों के ऊपर कूड़े के छींटे पड़ रहे हैं और उन्हें सड़ांध झेलनी पड़ रही है।
  • स्वास्थ्य से खिलवाड़: नियमानुसार सफाई सुबह सूरज निकलने से पहले पूरी हो जानी चाहिए, लेकिन यहां प्रशासन को जनता की सुविधा से कोई सरोकार नहीं है।

सुपर फेम वाली ‘अध्यक्षता’ पर उठते सवाल

​शहर की जनता अब जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठा रही है। नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मनोरमा मौर्य और उनके ‘सुपर फेम’ वाले प्रतिनिधि की लोकप्रियता के दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

​”क्या विधायक, क्या सांसद और क्या अधिकारी—किसी को भी सड़कों पर लगा यह अंबार और हवा में तैरता जहर दिखाई नहीं दे रहा?” शुभम यादव,स्थानीय निवासी

 

​फ़ास्ट ब्लिट्ज  रिपोर्ट: ये 3 बड़े सवाल जो जवाब मांगते हैं

  1. कूड़े में आग क्यों?: डंपिंग ग्राउंड के बजाय सड़कों के किनारे लगे ढेरों में आग लगाना क्या एनजीटी (NGT) के नियमों का उल्लंघन नहीं है?
  2. शिफ्टिंग में देरी क्यों?: जब पूरी दुनिया रात या अलसुबह सफाई करती है, तो जौनपुर में दोपहर 12 बजे तक सड़कों को क्यों घेरा जाता है?
  3. जिम्मेदारी किसकी?: पक्ष-विपक्ष की राजनीति के बीच जौनपुर की जनता को नरकीय जीवन जीने के लिए क्यों छोड़ दिया गया है?

​स्थानीय निकाय का मुख्य काम नागरिकों को स्वस्थ वातावरण देना है, लेकिन जौनपुर नगर पालिका फिलहाल बीमारी और बदहाली बांटने का केंद्र बनी हुई है। यदि समय रहते इस ‘सिस्टम’ की सफाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट सकता है।

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Author: fastblitz24

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