* बड़कू हनुमान आश्रम में ‘अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुंभ’ का पांचवा दिन रहा ऐतिहासिक, हजारों महिलाओं ने खाई मां जानकी की सौगंध

* ‘आजादी’ के नारों के बीच गूंजा ‘रिश्तों के बंधन’ का शंखनाद, अब्बास अली के भजनों और फरोग आलम की बांसुरी ने घोली फिजां में साम्प्रदायिक सौहार्द की मिठास, श्रोताओं ने मंत्र मुक्त होकर सुना


जलालपुर (जौनपुर), 15 जून


जहाँ कुछ ताकतें समाज को बांटने और ‘आजादी’ के खोखले नारे बुलंद करने में मसरूफ हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के जौनपुर में सामाजिक समरसता का एक ऐसा सैलाब उमड़ा जिसने मजहब की हर कृत्रिम दीवार को ढहा दिया। मौका था विशाल भारत संस्थान एवं राज राजेश्वर ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में बड़कू हनुमान आश्रम प्रांगण में चल रहे ‘अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुंभ’ के पांचवें दिन का। सोमवार को इस महाकुंभ में उस वक्त एक नया इतिहास लिखा गया, जब हजारों हिंदू और मुस्लिम महिलाओं ने एक-दूसरे का हाथ थामकर एक विशाल मानवीय शृंखला (मानव श्रृंखला) बनाई और मां जानकी की सौगंध खाकर पूरे विश्व को सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
पूर्वजों की विरासत और संस्कृति एक, इसे कोई नहीं बदल सकता: रामाशीष सिंह
नारी महाकुंभ के पांचवें दिन के सत्र का उद्घाटन करते हुए आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक एवं प्रज्ञा प्रवाह की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य रामाशीष सिंह ने कहा कि जब हम अपने पूर्वजों की संस्कृति को देखते हैं, तो वहां कोई भेद नजर नहीं आता।
”अगर हमारी संस्कृति एक नहीं होती, तो कबीर रामभक्त नहीं होते और रसखान कृष्ण की भक्ति में नहीं डूबते। आज अगर अब्बास अली माता जानकी के विदाई गीत गा रहे हैं और फरोग आलम पांडेय हनुमान जी को बांसुरी समर्पित कर रहे हैं, तो यह साबित करता है कि हमारी जड़ें एक हैं। सदियों बाद भी हमारा मूल नहीं बदल सकता।”
— रामाशीष सिंह, वरिष्ठ प्रचारक (RSS)

रिश्तों की पूंजी ही भारत की असली ताकत: डॉ. राजीव श्रीगुरुजी
रामपंथ के पंथाचार्य और विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने भावुक होते हुए कहा कि संबंधों के संसाधन और रिश्तों की पूंजी ही दुनिया में भारत को सबसे शक्तिशाली बनाती है। संकट के समय केवल रिश्ते ही काम आते हैं और माता जानकी ने पूरी दुनिया को रिश्तों की इसी अनमोल पूंजी का उपहार दिया है। हमारी सांस्कृतिक एकता को कोई ताकत नहीं तोड़ सकती।

धनुष यज्ञ था दुनिया का सबसे बड़ा समरसता विवाह: जगदगुरु बलकदेवाचार्य
विश्व में पहली बार हो रही ‘मातु जानकी कथा’ के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए जगदगुरु बलकदेवाचार्य जी महाराज ने कहा कि माता जानकी का विवाह (धनुष यज्ञ) दुनिया का सबसे बड़ा समरसता का उदाहरण था, जहां बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग को आमंत्रित किया गया था। भगवान राम ने ऊंच-नीच के भेद को मिटाकर हर छोटे-बड़े को गले लगाया।
विशेष आकर्षण: भजनों की सुरीली तान पर झूमा आश्रम
महाकुंभ का माहौल उस समय पूरी तरह सूफी और सनातनी रंग में रंग गया जब:
- अब्बास अली (काशी) ने अपनी मखमली आवाज में माता जानकी के विदाई का ऐसा कारुणिक भजन प्रस्तुत किया कि पंडाल में मौजूद हर आंख नम हो गई।
- फरोग आलम पांडेय ने अपनी बांसुरी की तान से बड़कू हनुमान जी के चरणों में स्वर-पुष्प अर्पित किए, जिसे सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो गए।
खोखली ‘आजादी’ नहीं, हमें चाहिए जोड़ने वाला ‘जानकी सूत्र’
पंडाल में जुटी हजारों महिलाओं ने एक सुर में कहा कि देश को तोड़ने वाले ‘आजादी’ का नारा लगाते हैं, लेकिन यह महाकुंभ पूरे समाज को एक सूत्र में पिरोने का ‘जानकी सूत्र’ दे रहा है।
इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में प्रभु रामदास जी, आभा उपाध्याय, डॉ. कवीन्द्र नारायण, अफरोज पांडेय, संदीप मिश्र, डॉ. अर्चना भारतवंशी, प्रो. पंकज मिश्रा, डॉ. नजमा परवीन, डॉ. मृदुला जायसवाल, शैलेन्द्र शुक्ला, युवा परिषद की चेयरपर्सन जीनत रहमान सहित विवेक मिश्रा, अजीत सिंह और द्वारिका प्रसाद खरवार ने सक्रिय भूमिका निभाई।
Author: fastblitz24


