नई ऐप व्यवस्था और लगातार बढ़ते किराये के विरोध में प्रदेशव्यापी आंदोलन
व्यापार मंडल ने नीति को बताया ‘व्यापारी-विरोधी’
विशेष संवाददाता

जौनपुर, 19 जून।


उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादों के व्यापार को विनियमित करने के लिए सरकार द्वारा लागू की गई नई डिजिटल व्यवस्था और वित्तीय नीतियों के खिलाफ व्यापारियों का असंतोष गहराता जा रहा है। जौनपुर उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले शुक्रवार को व्यापारियों के एक शीर्ष प्रतिनिधिमंडल ने शासन को संबोधित एक ज्ञापन मंडी सचिव ध्रुव चौधरी को सौंपा। यह कदम प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा है, जिसके तहत आज राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए।
यह विरोध मुख्य रूप से मंडी समितियों द्वारा बिना पूर्व परामर्श के थोपे गए नए मोबाइल एप्लिकेशन (ऐप), सालाना किराया वृद्धि और तकनीकी खामियों के खिलाफ केंद्रित है।
प्रमुख मांगें और आपत्तियां
व्यापारियों ने शासन के समक्ष अपनी चिंताओं को रेखांकित करते हुए एक विस्तृत मांग पत्र प्रस्तुत किया है। मुख्य आपत्तियां निम्नलिखित हैं:
- अनावश्यक ऐप अनिवार्यता और आर्थिक बोझ: व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष दिनेश टंडन के अनुसार, मंडी समिति द्वारा वाहनों के आवागमन के लिए लागू की गई नई ऐप व्यवस्था तकनीकी रूप से अत्यधिक जटिल है। व्यापारियों का तर्क है कि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले किसी भी हितधारक (व्यापारी संगठनों) से परामर्श नहीं लिया गया, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक और प्रशासनिक बोझ बढ़ गया है।
- वार्षिक किराया वृद्धि पर रोक की मांग: ज्ञापन में दुकानों के मासिक किराये में हर साल होने वाली 5\% की स्वचालित वृद्धि (Automatic Escalation) का कड़ा विरोध किया गया है। व्यापारियों का कहना है कि कृषि उत्पादों के बाजार मूल्य में निरंतर उतार-चढ़ाव होता रहता है, ऐसे में यह वृद्धि उनके लिए असहनीय है।
- वर्ष 2010 के शासनादेश का उल्लंघन: संगठन ने आरोप लगाया कि मंडी समिति वर्ष 2010 के मूल आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने में विफल रही है। ‘बी-क्लास’ सहित अन्य निचली श्रेणियों की दुकानों के किराये में की गई वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है, क्योंकि यह वर्ग बेहद सीमित मुनाफे पर काम करता है।
तकनीकी बुनियादी ढांचे (IT Infrastructure) पर उठे सवाल
व्यापारियों ने सरकार के ‘डिजिटल गवर्नेंस’ के दावों पर सवाल उठाते हुए ऑनलाइन पोर्टल और मंडी ऐप की गंभीर तकनीकी खामियों को उजागर किया है।
”मंडी शुल्क (टैक्स) का सफलतापूर्वक भुगतान करने के बाद भी पोर्टल पर व्यापारियों का बकाया प्रदर्शित होता रहता है। सर्वर डाउन होने की वजह से टोल पर्ची जनरेट होने और वाहनों के प्रवेश में घंटों का विलंब हो रहा है। रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध न होने से पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता का अभाव है।”
— दिनेश टंडन, जिलाध्यक्ष, जौनपुर उद्योग व्यापार मंडल
देशव्यापी और प्रदेशव्यापी रणनीति
जौनपुर नगर अध्यक्ष राधेरमण जायसवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष सोमेश्वर केसरवानी और प्रदेश मंत्री महेंद्र सोनकर ने एक संयुक्त बयान में कहा कि आज 19 जून को पूरे उत्तर प्रदेश में एक साथ इस ‘व्यापारी-विरोधी’ कानून के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन ने इन नियमों में अविलंब संशोधन नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने मंडी सचिव से आग्रह किया है कि इस ज्ञापन की प्रतियों को आज ही जिलाधिकारी (जौनपुर), उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री और उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य मंडी सचिव को प्रेषित किया जाए।
इस अवसर पर जिला महामंत्री रामकुमार साहू, नगर महामंत्री मुन्नालाल अग्रहरि सहित संजय केडिया, संतोष साहू, विजय अग्रहरी और भारी संख्या में स्थानीय थोक व खुदरा व्यापारी उपस्थित थे।
Author: fastblitz24


