केंद्र ने नए एफिडेविट में कहा था- आतंकवाद खत्म करने का एक ही रास्ता था, आर्टिकल 370 हटाना नई दिल्ली।
जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली 23 याचिकाओं पर बुधवार (2 अगस्त) सुबह 10.30 बजे से सुप्रीम कोर्ट में रेगुलर सुनवाई शुरू हो गई है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली पांच जजों की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। इनमें जस्टिस एस के कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं। आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट में 3 साल बाद सुनवाई हो रही है। इससे पहले, 2020 में 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने इस मामले की सुनवाई की थी। तब अदालत ने कहा था कि हम मामला बड़ी संवैधानिक बेंच को ट्रांसफर कर रहे हैं। 11 जुलाई को इस मामले को लेकर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली बेंच ने अलग-अलग पार्टियों के लिए लखित याचिका दाखिल करने के लिए 27 जुलाई की डेडलाइन तय की थी। बेंच ने कहा था, हम इन याचिकाओं पर सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर हर दिन सुनवाई करेंगे। इस मामले को लेकर आखिरी सुनवाई 11 जुलाई को हुई थी। इससे एक दिन पहले 10 जुलाई को केंद्र ने इस मामले में नया एफिडेविट दाखिल किया था। केंद्र ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर 3 दशकों तक आतंकवाद झेलता रहा। इसे खत्म करने का एक ही रास्ता था आर्टिकल 370 हटाना। याचिकाकर्ताओं का नेतृत्व कर रहे सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने आखिरी सुनवाई के दौरान कहा था कि दो याचिकाकर्ता ढ्ढ्रस् शाह फैसल और शेहला राशिद शोरा ने याचिका वापस लेने के लिए अपील की है। इस पर केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि अगर कोई याचिकाकर्ता अपना नाम वापस लेना चाहता है तो उन्हें कोई कठिनाई नहीं है। इसके बाद बेंच ने नाम वापसी की अनुमति दे दी। केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया था। अक्टूबर 2020 से संविधान पीठ ही इस मामले की सुनवाई कर रही है। 6 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बिना किसी देरी के विधानसभा चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि अनुच्छेद 370 से जुड़ा मामला 11 जुलाई को लिस्टेड है और इसके बाद ही चुनाव को लेकर सुनवाई करेंगे।


Author: fastblitz24



