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दो दशक पुराने खाद्यान्न घोटाले में EOW का बड़ा एक्शन, जौनपुर से मुख्य आरोपी कोटेदार दबोचा गया!

मजदूरों के हक पर डाका: कागजों पर बनीं नालियां और सड़कें, गरीबों के निवाले का ₹16.50 लाख डकारने वाले सिंडिकेट का पर्दाफाश!

विशेष संवाददाता

जौनपुर/वाराणसी

​उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत, आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) की वाराणसी इकाई ने करीब दो दशक पुराने एक बड़े खाद्यान्न घोटाले में बड़ी सफलता हासिल की है। वित्तीय अनियमितता और लोक धन के गबन के गंभीर आरोपों में घिरे एक कोटेदार को जौनपुर जिले से गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई वर्ष 2004-05 के दौरान तत्कालीन ‘सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना’ (SGRY) में हुए कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी है।

गरीबों के लिए आया अनाज बाजार में बेचा गया

​मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो विकास खंड केराकत के अंतर्गत आने वाले विभिन्न ग्राम सभाओं में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई जनहित कार्य प्रस्तावित किए गए थे। इनमें संपर्क मार्गों का निर्माण, नाली निर्माण और मिट्टी भराई जैसे काम शामिल थे। इस कल्याणकारी योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को रोजगार देना और मजदूरी के बदले आंशिक या पूर्ण रूप से खाद्यान्न (चावल) उपलब्ध कराकर उनकी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

​आरोप है कि इस योजना के क्रियान्वयन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कोटेदारों के एक संगठित सिंडिकेट ने सरकारी दिशानिर्देशों को ताक पर रख दिया। वास्तविक मजदूरों को अनाज देने के बजाय, फर्जी मस्टर रोल और कूटरचित (जाली) दस्तावेजों के सहारे लगभग ₹16.50 लाख के सरकारी धन और खाद्यान्न का खुलेआम गबन कर लिया गया।

वर्ष 2020 में दर्ज हुआ था मुकदमा

​इस सुनियोजित घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब प्राथमिक जांच के बाद वर्ष 2020 में वाराणसी के ईओडब्ल्यू थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। लंबे समय तक चली गहन तकनीकी और दस्तावेजी जांच के बाद, ईओडब्ल्यू ने पुख्ता सबूतों के आधार पर आरोपी सुरेंद्र प्रताप सिंह को नामजद किया। आरोपी सुरेंद्र प्रताप सिंह, जौनपुर जिले के केराकत थाना क्षेत्र के ग्राम हुरहुरी का निवासी है।

जांच एजेंसी का वक्तव्य:

“आरोपी ने अन्य सह-अभियुक्तों और तत्कालीन लोक सेवकों (Public Servants) के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची। सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर उस खाद्यान्न को अवैध रूप से ठिकाने लगाया गया, जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लिए आवंटित था।”

तड़के दी गई दबिश, अन्य आरोपियों पर भी शिकंजा

​ईओडब्ल्यू के पुलिस अधीक्षक प्रदीप कुमार के कुशल निर्देशन में इस संवेदनशील ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। खुफिया इनपुट के आधार पर गठित विशेष टीम ने मंगलवार सुबह केराकत क्षेत्र में घेराबंदी कर आरोपी सुरेंद्र प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इस सफल कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में निरीक्षक सुनील कुमार वर्मा, निरीक्षक करणेश सिंह, मुख्य आरक्षी प्रिंस तिवारी, रामाश्रय सिंह और सरफराज अंसारी शामिल थे।

​ईओडब्ल्यू के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह गिरफ्तारी इस बहुचर्चित घोटाले की अंतिम कड़ी नहीं है। एजेंसी अब इस मामले में शामिल अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका की कड़ाई से पड़ताल कर रही है। आने वाले दिनों में कुछ और रसूखदार चेहरों की गिरफ्तारियां संभव हैं, जिससे जिले के प्रशासनिक हलके में हड़कंप मचा हुआ है।

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Author: fastblitz24

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