वॉशिंगटन.. अमेरिकी सूत्रों ने खुलासा किया है कि इजरायल ने ईरान पर अमेरिका के संभावित हमले का विरोध किया था। जिसके बाद अमेरिका ने ईरान पर हमला करने से परहेज किया है। अमेरिकी सूत्रों के मुताबिक पिछले हफ्ते इजरायल के टॉप नेताओं ने ट्रंप प्रशासन को ईरान पर हमला नहीं करने के लिए संदेश भेजा था। हालांकि,, इजरायल का मानना था कि अगर ईरान दुर्लभ स्थिति में भी अगर 700 मिसाइलों तक हमला करता है, तो जून महीने में किए गये 500 बैलिस्टिक मिसाइल हमले के समय जितना नुकसान हुआ था, उससे ज्यादा नुकसान इस बार भी होता।
इजरायली अधिकारियों का मानना था कि अगर अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन से ईरान में सरकार गिरती, तो इजरायल को जितना नुकसान होता, वो उसे मंजूर होता। ये नुकसान ना सिर्फ उसे स्वीकार्य होती, बल्कि ईरान में सरकार का गिरना उसके लिए फायदेमंद भी था। हालांकि इजरायली अधिकारियों का मानना था कि ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की स्थिति में उसके एयर डिफेंस सिस्टम पर अभूतपूर्व प्रेशर पड़ता। इजरायल ने अपने घरेलू और अमेरिकी एयर डिफेंस को मिलाकर, मल्टी लेयर एयर डिफेंस सिस्टम तैयार किया हुआ है।

इजरायली अधिकारियों ने तर्क किया था कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो जिस तरह से हमले की योजना बनाई गई थी, उससे ईरान की सरकार को गिराने की योजना कामयाब नहीं हो पाती। जबकि इस हमले की वजह से होने वाला नुकसान काफी ज्यादा हो सकता था। मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंच सकता था और कई दिनों तक ईरान की सरकार अस्थिर रह सकती थी। लेकिन ईरान में सरकार का सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता था। इसीलिए इजरायल ने अमेरिकी प्रशासन से ईरान पर हमला करने का विरोध किया था। ट्रंप प्रशासन ने भी ईरान पर इजरायल के फैसले को सही माना और हमला नहीं किया गया। इजरायल को डर था कि सरकार गिरने के बजाए एक लंबा संघर्ष शुरू होने का खतरा बन सकता था।


Author: fastblitz24



