
सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के आदेश के अनुक्रम में कोर्ट ने दी अनुमति
अभियोजन पक्ष की अर्जी पर एसीजेएम द्वितीय ने सुनाया फैसला, सात साल पुराने मामले का पटाक्षेप


जौनपुर। निज संवाददाता
भारतीय जनता पार्टी की राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी समेत 12 आरोपितों को बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान पंवारा थाने में दर्ज आचार संहिता उल्लंघन के मामले को राज्यपाल की अनुमति के बाद वापस ले लिया गया है। एसीजेएम द्वितीय अनुज कुमार जौहर की अदालत ने अभियोजन अधिकारी की अर्जी को स्वीकार करते हुए सभी आरोपितों को दोषमुक्त करने का आदेश जारी किया।
क्या था मामला?
अभियोजन के अनुसार, 7 मार्च 2017 को तत्कालीन हेड कांस्टेबल दीपचंद राम ने पंवारा थाने में तहरीर दी थी कि भगौती चौराहा के पास चार वाहनों के माध्यम से भाजपा प्रत्याशी सीमा द्विवेदी के पक्ष में प्रचार किया जा रहा था। पुलिस ने मौके से 11 लोगों को हिरासत में लिया था और विवेचना के पश्चात सीमा द्विवेदी सहित सभी के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
विधिक प्रक्रिया और कोर्ट का तर्क
मामले की सुनवाई के दौरान जिरह में यह तथ्य उभरकर सामने आया कि घटना के समय सांसद सीमा द्विवेदी मौके पर मौजूद नहीं थीं। साथ ही, कथित प्रचार वाहनों से कोई चुनाव सामग्री, पोस्टर, बैनर या लाउडस्पीकर बरामद नहीं हुआ था और न ही पुलिस ने घटना की कोई फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी कराई थी।
राज्यहित में लिया गया फैसला
सरकारी वकील ने कोर्ट में धारा 321 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत प्रार्थना पत्र देते हुए तर्क दिया कि इस मामले को चलाने से समाज के हित पर कोई अनुकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, अतः जनहित और राज्यहित में इसे वापस लिया जाना आवश्यक है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2021 के आदेश और इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जनवरी 2026 में दी गई अनुमति का संज्ञान लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश शासन के पत्रांक के आलोक में मुकदमा वापस लेने का आधार पर्याप्त है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों के अभाव में अभियोजन की सफलता की संभावना नगण्य है, जिसके बाद सभी आरोपितों को बाइज्जत दोषमुक्त कर दिया गया।
Author: fastblitz24



