जिले भर में गुरु-शिष्य परंपरा का दिखा अटूट पर्व; मंदिरों, मठों और आश्रमों में सुबह से शाम तक लगी रही श्रद्धालुओं की कतारें
जौनपुर : आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुद्ध वार को पूरे जिले में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यधिक श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक संस्थानों, आश्रमों और मठों में विशेष पूजन, हवन, कथा तथा महाभंडारे का भव्य आयोजन किया गया, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने-अपने गुरुजनों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
सिद्धिविनायक धाम में कथा एवं विशाल भंडारे का आयोजन
महाराजगंज क्षेत्र के नखतपुर (सराय दुर्गादास) स्थित सिद्धिविनायक धाम में ‘श्री रामदूतम चैरिटेबल ट्रस्ट (अयोध्या)’ के तत्वावधान में भव्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विशेष आरती, गुरु-पूजन और विधि-विधान से किए गए हवन के साथ हुआ।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष निर्मल शरण महाराज ने गुरु-शिष्य परंपरा तथा आध्यात्मिक जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “मानव जीवन में अज्ञानता के अंधकार को दूर कर सन्मार्ग दिखाने का कार्य केवल गुरु ही कर सकते हैं।”
पूजन व धार्मिक कथा के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से आए साधु-संतों, स्थानीय ग्रामीणों और भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन को सफल बनाने में ट्रस्ट के स्वयंसेवकों व पदाधिकारियों की सराहनीय भूमिका रही। इसके साथ ही सद्गुरु सेवा आश्रम में भी श्री उमा दास महाराज का आशीर्वाद लेने हेतु भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

बारीनाथ मठ और देवरहा बालक बाबा आश्रम में उमड़े भक्त
शहर के उर्दू बाजार स्थित ऐतिहासिक बारीनाथ मठ संस्थान के प्रांगण में गुरु पूर्णिमा महोत्सव बड़े पैमाने पर मनाया गया।
उधर नौपेड़वा क्षेत्र के हैदरपुर स्थित देवरहा बालक बाबा महाराज के आश्रम में भी प्रातःकाल से ही भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने गुरु बालक बाबा का दर्शन-पूजन कर प्रसाद ग्रहण किया। आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को दृष्टिगत रखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।

योग साधकों ने किया यज्ञ, पतंजलि समिति ने दिया साधना का संदेश
केराकत स्थित तहसील बार एसोसिएशन के हॉल में ‘भारत स्वाभिमान न्यास’ एवं ‘पतंजलि योग समिति’ के संयुक्त तत्वावधान में विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित योग साधकों ने गुरु के बताए आदर्शों और मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
पतंजलि योग समिति के जिला सह-प्रभारी शम्भूनाथ यादव ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि गुरु के मार्गदर्शन और दिखाए गए सत्य के मार्ग का अनुसरण करके ही मनुष्य अपने जीवन में सर्वोच्च लक्ष्य की प्राप्ति कर सकता है।
संपादकीय दृष्टिकोण: गुरु पूर्णिमा का महत्व
मानव जीवन में गुरु का स्थान:
भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गुरु को ‘साक्षात परब्रह्म’ का दर्जा दिया गया है। ‘गु’ का अर्थ अंधकार और ‘रु’ का अर्थ प्रकाश होता है—अर्थात जो जीव को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाए, वही गुरु है।
गुरु पूर्णिमा का यह पावन पर्व न केवल आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में कृतज्ञता, अनुशासन, विनम्रता और उच्च नैतिक मूल्यों की आधारशिला को भी मजबूत करता है।




