जौनपुर। शहर के मुफ़्ती मोहल्ला स्थित मौला अलीघाट पर 20 सफ़र के मौके पर निकाला जाने वाला ऐतिहासिक ‘दरिया वाला जुलूस’ पूरी अकीदत, ग़म और शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। इस दौरान अकीदतमंदों के जनसैलाब ने हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदा-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
सोज़ख़्वानी और मजलिस से हुआ आगाज़: जुलूस से पूर्व आयोजित मजलिस की शुरुआत मरहूम नज़र हसन एडवोकेट के हमनवा जनाब सैय्यद मेहदी जैदी की सोज़ख़्वानी से हुई। इसके बाद नासिरिया अरबी कॉलेज के प्रिंसिपल व इमाम-ए-जुमा मौलाना महफ़ूज़ुल हसन ख़ाँ क़िब्ला ने मजलिस को संबोधित किया। उन्होंने कर्बला के पैग़ाम, सब्र, इंसाफ़ और शहीदों की अज़ीम कुर्बानियों पर रोशनी डाली।

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संचालन व तक़रीर: कार्यक्रम की नक़ाबत मौलाना ज़ीशान आज़मी (शान) ने की, जबकि मौलाना हसन अकबर ख़ाँ रन्नवी ने तक़रीर पेश की।
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पेशख़्वानी व नौहाख़्वानी: मौलाना बाक़र मेहदी, जनाब असलम नक़वी, एजाज़ जौनपुरी और ज़ैन मिर्ज़ापुरी ने पेशख़्वानी की ख़िदमत अंजाम दी। मशहूर नौहाख़्वां जनाब अली मूसा के दर्दभरे नौहों पर अकीदतमंदों ने मातम कर पुरसा दिया।
“या हुसैन” की सदाओं से गूंज उठा क्षेत्र: मजलिस के बाद जुलूस अपने पारंपरिक मार्ग से रवाना हुआ। “या हुसैन” और “ऐ हुसैन” की सदाओं के बीच महिलाओं, पुरुषों, बुज़ुर्गों और बच्चों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। रास्ते में जगह-जगह जुलूस का स्वागत किया गया और अकीदतमंदों के लिए सबीलों का भी इंतज़ाम रहा।
दरिया में सुपुर्द किए गए प्रतीक: चेहलुम की रस्मों के तहत जुलूस के समापन पर पारंपरिक रूप से ताबूत व अन्य प्रतीकों को मौला अलीघाट पर दरिया में सुपुर्द किया गया। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस व प्रशासन के कड़े इंतज़ाम रहे, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण संपन्न हुआ।
कमेटी ने जताया आभार: अंजुमन सज्जादिया (रजि.), अली कमेटी, हुसैन कमेटी और अहले मोहल्ला की ओर से मोमिनीन, उलमा, नौहाख़्वानों, पुलिस-प्रशासन और मीडियाकर्मियों का आभार व्यक्त किया गया। आभार जताने वालों में अंजुमन के सदर हुसैन रज़ा (मीसम), जनरल सेक्रेटरी हसन ज़ाहिद ख़ान (बाबू), नायब सदर हाजी मोहम्मद मेहदी, ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉ. ज़फ़र आब्दी, ख़ज़ानची रौनक़ अब्बास और मीडिया प्रभारी आबिश इमाम (सनी) शामिल रहे।




