जौनपुर: एक ओर जहां केंद्र और राज्य सरकारें ‘स्वच्छता अभियान’ चलाकर शहरों और गांवों को स्वच्छ रखने का मिशन चला रही हैं, वहीं दूसरी ओर जौनपुर की नगर पंचायत कजगांव में इस अभियान को पूरी तरह से मुंह चिढ़ाया जा रहा है। यहां जगह-जगह कूड़े और कचरे का अंबार लगा हुआ है, जिसके कारण पूरा क्षेत्र नारकीय बना हुआ है। सफाई व्यवस्था को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी ‘कुंभकर्णी निद्रा’ में लीन दिख रहे हैं, जिससे स्थानीय निवासियों का जीवन दूभर हो गया है और संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।

नगर पंचायत कजगांव में साफ-सफाई के लिए दर्जनों से अधिक सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। सफाई कर्मचारियों द्वारा केवल खानापूर्ति की जा रही है, जिसके चलते गलियों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी का ढेर लगा हुआ है। ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा चलाया जा रहा स्वच्छता अभियान इस नगर पंचायत में पूरी तरह से विफल होता दिख रहा है। यह कहावत यहां चरितार्थ हो रही है कि “अगर सरकार डाल-डाल तो नगर पंचायत पात-पात”। नगर पंचायत कजगांव अपने इस प्रकार के कारनामों को लेकर हमेशा चर्चा में बनी रहती है, जहां बुनियादी सुविधाओं की घोर अनदेखी की जा रही है।
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लगातार फैली गंदगी के कारण कजगांव के लोग मच्छरों के प्रकोप से बुरी तरह परेशान हैं। नालियां जाम हैं, और कूड़े के ढेरों पर मच्छरों का आतंक बढ़ गया है। इससे लोगों को डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और अन्य घातक बीमारियों का डर सता रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर पंचायत अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी और संबंधित कर्मचारियों से शिकायत की है, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह से उदासीन हो चुके हैं और जनता की परेशानी से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। मानसून के आगमन से पहले इस गंदगी का निपटारा न होने पर स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
Author: fastblitz24



