विशाल भंडारे में 5 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पाया प्रसाद
- भक्तिमय माहौल: प्रसिद्ध गायक रविंद्र सिंह ज्योति के भजनों पर झूमे भक्त, ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंजा पूरा क्षेत्र
- सामूहिक सहयोग: चंद्रवंशी राजपूतों की कुल देवी के दरबार में जुटे कई गांवों के लोग, देर शाम तक चलता रहा महाप्रसाद का दौर
जौं नपुर।

क्षेत्र के ग्राम सभा चाँदपुर स्थित प्रसिद्ध मनिया देवी मंदिर प्रांगण में चल रहे अखंड रामायण पाठ का भव्य समापन हो गया। इस धार्मिक अनुष्ठान के पूर्ण आहुति के उपरांत मंदिर परिसर में एक विशाल भंडारे (महाप्रसाद) का आयोजन किया गया। इसमें आस्था और श्रद्धा का ऐसा सैलाब उमड़ा कि आसपास के तमाम क्षेत्रों से आए 5000 से अधिक श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर बेहद अनुशासित तरीके से प्रसाद ग्रहण किया।


यह पावन और भव्य आयोजन चंद्रवंशी राजपूतों की कुल देवी माँ मनिया देवी के मंदिर परिसर में संपन्न हुआ, जहाँ सुबह से ही माता के दर्शन और प्रसाद पाने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
भजनों पर मंत्रमुग्ध हुए श्रोता, गूंजे जयकारे
भक्ति और आस्था के इस अनूठे संगम में जहाँ एक तरफ भंडारे में प्रसाद वितरण चल रहा था, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समां बांध दिया। कार्यक्रम में विशेष रूप से आमंत्रित सुप्रसिद्ध देवी गीत गायक रविंद्र सिंह ज्योति ने अपनी सुरीली आवाज में एक से बढ़कर एक भक्ति गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। उनकी मनमोहक गायकी ने पंडाल में मौजूद हजारों श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भजनों के बीच-बीच में भक्तों द्वारा लगाए जा रहे ‘जय माता दी’ के गगनभेदी जयकारों से पूरा इलाका पूरी तरह भक्तिमय और गुंजायमान नजर आया।
व्यवस्था संभालने में जुटे रहे दिग्गज
इस बड़े धार्मिक आयोजन को सुव्यवस्थित और सफल बनाने में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और ग्रामीणों ने दिन-रात एक कर दिया। भंडारे और सांस्कृतिक कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ को संभालने और व्यवस्था को सुचारू रखने में:
- अरुण कुमार सिंह
- पंकज सिंह
- विनोद कुमार सिंह
- बालकोर सिंह
- जय प्रकाश सिंह
- अरविंद सिंह
- विमल कांत सिंह
- समाजसेवी प्रेम प्रकाश सिंह
सहित तमाम युवाओं और वरिष्ठों ने अपनी महत्वपूर्ण व सक्रिय भूमिका निभाई।
देर शाम तक चलता रहा उत्सव
आयोजन समिति और ग्रामीणों ने इस भव्य आयोजन की निर्विघ्न सफलता का पूरा श्रेय माँ मनिया देवी के आशीर्वाद को दिया। आयोजकों ने कहा कि यह ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों के आपसी सहयोग और अटूट श्रद्धा का ही परिणाम है कि इतना बड़ा अनुष्ठान अत्यंत भव्यता और सौहार्दपूर्ण रूप से संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में महाप्रसाद ग्रहण करने का सिलसिला सुबह से शुरू होकर देर शाम तक अनवरत चलता रहा, जिससे यह धार्मिक उत्सव क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
Author: fastblitz24


