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महान क्रांतिकारी अशफ़ाक उल्ला खान का 125 वां जन्म दिवस समारोह आयोजित हुआ

 

जौनपुर. बदलापुर, आजादी आंदोलन के गैर समझौतावादी धारा के महान क्रांतिकारी व काकोरी-ऐक्शन के अमर शहीद अशफाक उल्ला खान की 125 वें जन्म दिवस 22 अक्टूबर के अवसर पर श्री रामचंद्र जूनियर हाईस्कूल खजुरन बदलापुर जौनपुर के प्रांगण में जन्म दिवस समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन “काकोरी-ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति जौनपुर” के तत्वावधान में किया गया। इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संजय यादव (अध्यापक) और संचालन- राकेश निषाद व पूनम प्रजापति ने संयुक्त रूप से किया।श्री प्रमोद कुमार शुक्ल (जिला सचिव, काकोरी-ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति, जौनपुर) ने कहा कि – महान क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खान का जन्म 22 अक्टूबर सन् 1900 ई. को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था। छात्र जीवन में ही रामप्रसाद बिस्मिल से प्रभावित होकर क्रांतिकारी संगठन- हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़ गये और क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में ऐतिहासिक काकोरी-ऐक्शन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिए और 19 दिसम्बर 1927 को फैजाबाद की जेल में हंसते हुए फांसी के फंदे चूम लिए। अशफाक उल्ला खान एक अच्छे शायर थे। बिस्मिल के साथ अंतिम मुलाकात में अशफाक ने कहा- “जाऊंगा खाली हाथ मगर ये दर्द साथ ही जायेगा,

जाने किस दिन हिन्दोस्तान आज़ाद वतन कहलायेगा ?”
बिस्मिल हिन्दू हैं, कहते हैं “फिर आऊंगा, फिर आऊंगा”
फिर आकर के ऐ भारत मां तुझको आजाद कराऊंगा”
जी करता है मैं भी कह दूं पर मजहब से बंध जाता हूं,
हां खुदा अगर मिल गया कहीं, अपनी झोली फैला दूंगा,
और जन्नत के बदले उससे, एक पुर्नजन्म ही मांगूंगा।”

प्रमोद कुमार शुक्ल ने आगे कहा कि- आजादी आंदोलन के काकोरी ऐक्शन में शहीद क्रांतिकारियों के जीवन संघर्षों से सीख लेने की प्रासंगिकता आज बढ़ती जा रही है। रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान की ऐसी बेमिसाल दोस्ती थी, जो फांसी तक साथ चले। एक कट्टर आर्य समाजी और दूसरा पक्का मुसलमान होते हुए भी आजादी की लड़ाई में हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिशाल कायम की। उनकी दोस्ती को तोड़ने और नफरत फैलाने की अंग्रेजों की सारी साज़िशें नाकाम रहीं। हास्यापद है कि आजादी के 78 सालों के बाद आजाद भारत में भी जाति-धर्म, क्षेत्र-सम्प्रदाय के नाम पर आम जनता को आपस में लड़ाकर उनकी एकता को तोड़कर वोट की राजनीति आज की सरकारें कर रही हैं और जन विरोधी नीतियां आम जनता पर थोप रही हैं। युवाओं को रोजगार से वंचित कर उनमें नशाखोरी, अपराध, अपसंस्कृति पैदा की जा रही है। कहीं भी महिलायें सुरक्षित नहीं हैं। शिक्षा, संस्कृति व मानवता पर हमले बढ़ रहे हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में छात्रों युवाओं का नैतिक मेरुदंड मजबूत करने व जन समस्याओं के खिलाफ संगठित जन आन्दोलन तैयार करने के लिए देश के महापुरुषों व क्रांतिकारियों से सीख लेकर अपने जीवन में उतारने की जरूरत है। यही समय की मांग है।

कार्यक्रम को लालताप्रसाद यादव (सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक), राजेश सिंह (अध्यापक), इन्दुकुमार शुक्ल (एडवोकेट), संतोष कुमार प्रजापति (कार्यालय सचिव), समिति अन्य पदाधिकारी अपूर्व दूबे, नदीम असगर, अंजली सरोज, विवेक कुमार ने भी सम्बोधित किए। कार्यक्रम में रुपा विश्वकर्मा, आजाद गुप्ता, विजय प्रकाश गुप्ता व अन्य ने देशभक्ति व क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किए। अंत में बिस्मिल द्वारा रचित प्रसिद्ध क्रांतिकारी गीत “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।” दिलीप कुमार खरवार के द्वारा प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

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Author: fastblitz24

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