🔴 Fast Blitz 24: जौनपुर से बड़ी खबर
📌 एडेड कॉलेज परिसर में नियमों की उड़ीं धज्जियां, क्या शिक्षक आचरण नियमावली के नियम बेअसर हो चुके हैं??
जौनपुर | Fast Blitz 24
जौनपुर: जनपद के शिक्षा जगत से एक ऐसा मामला सामने आया है जो सरकारी नियमों और शैक्षणिक मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जनपद के ऐतिहासिक राजा श्रीकृष्ण दत्त इण्टर कालेज के मुख्य प्रवेश द्वार (फ्रंटेज) पर एक राजनीतिक दल का विशाल होर्डिंग/बैनर लगाया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बैनर पर खुद को दल का ‘राष्ट्रीय सचिव’ बताने वाले व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि इसी कॉलेज में कार्यरत एक शिक्षक हैं।
छात्रों के भविष्य और निष्पक्षता पर सवाल
एक सरकारी सहायता प्राप्त (Aided) शैक्षणिक संस्थान में इस तरह की गतिविधि पूरी तरह से नियम-विरुद्ध बताई जाती है। उत्तर प्रदेश सेवा नियमावली और अन्य विधिक प्रावधानों के तहत किसी भी सरकारी, सहायता प्राप्त (Aided) या परिषदीय विद्यालय के शिक्षक द्वारा स्कूल परिसर या उसके फ्रंटेज पर किसी राजनैतिक दल का बैनर लगाना पूरी तरह से प्रतिबंधित और नियम विरुद्ध है।
- लोक सेवक की श्रेणी: एडेड कॉलेज के शिक्षक और प्रधानाचार्य तकनीकी रूप से लोक सेवक (Public Servants) की श्रेणी और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण में आते हैं।
- संपत्ति का राजनीतिक उपयोग बैन: उत्तर प्रदेश एडेड इंटर कॉलेज आचरण नियमावली के तहत, कोई भी शिक्षक कॉलेज की चल या अचल संपत्ति का उपयोग किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं कर सकता।
- एक्ट का खुला उल्लंघन: कॉलेज के मुख्य गेट या फ्रंटेज (जैसा कि राजा श्रीकृष्ण दत्त इण्टर कालेज, जौनपुर के प्रवेश द्वार पर दिख रहा है) पर इस तरह का बैनर लगाना सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 (UP Intermediate Education Act, 1921) और समय-समय पर जारी सरकारी शासनादेशों का खुला उल्लंघन है।
- शिक्षा के मंदिर की मर्यादा तार-तार: उत्तर प्रदेश शिक्षक आचरण नियमावली के तहत लोक सेवकों का किसी राजनीतिक दल का पदाधिकारी बनना या परिसर का राजनीतिकरण करना प्रतिबंधित है। एक शिक्षक के इस कृत्य से कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के बीच एक बेहद नकारात्मक संदेश जा रहा है, जिससे शिक्षा के मंदिर की तटस्थता और शुचिता धूमिल हो रही है।
अस्तित्व और चुनावी जनाधार का सच
जिस राजनीतिक दल (किसान आमजन युवा शोषित ट्रेडर्स हमारी पार्टी – KAYSTH PARTY) का यह बैनर है, उसका संगठनात्मक सच भी दिलचस्प है।
- 2024 में बनी पार्टी: चुनाव नजदीक आते ही धरातल पर कुकुरमुत्ते की तरह सामने आने वाले राजनीतिक दलों की फेहरिस्त में शामिल यह दल महज दो साल पहले (वर्ष 2024 में) अस्तित्व में आया था।
- गैर-मान्यता प्राप्त दल: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के रिकॉर्ड के अनुसार, यह दल वर्तमान में केवल एक ‘गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत दल’ (RUPP) की श्रेणी में आता है। इसे अभी तक आयोग की सूची में एक ‘क्षेत्रीय दल’ (State Party) तक का दर्जा हासिल नहीं हुआ है।
- शून्य चुनावी जनाधार: सबसे बड़ी बात यह है कि इस दल ने अब तक कभी भी जनता की अदालत (चुनाव) में अपनी किस्मत नहीं आजमाई है और न ही अपनी कोई चुनावी जमीन तैयार की है। हालांकि संबंधित शिक्षक अपने राजनीतिक उद्देश्य के प्रति इतने गंभीर हैं कि बैनर पर उनकी छवि के साथ उ.प्र. विधानसभा की छवि और विधानसभा क्षेत्र का भी जिक्र है।क्या अधिकारी लेंगे संज्ञान?
बगैर किसी ठोस राजनीतिक पृष्ठभूमि या चुनावी जनाधार वाले दल के प्रचार के लिए पूरे कॉलेज के फ्रंटेज को राजनीतिक अखाड़े में तब्दील कर देना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। अब देखना यह है कि जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) जौनपुर और शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी इस खुले नियम-उल्लंघन पर क्या संज्ञान लेते हैं, या फिर नियमों की यह धज्जियां ऐसे ही उड़ती रहेंगी?
कॉलेज के जिम्मेदारों को गलती का अहसास, पर त्वरित कार्रवाई नहीं
इस पूरे मामले पर जब कॉलेज प्रशासन के जिम्मेदार चेहरों से अनौपचारिक तौर पर बात की गई, तो उन्होंने भी दबी जुबान में माना कि कॉलेज के मुख्य गेट पर इस तरह का राजनैतिक बैनर टंगना नियम-विरुद्ध और गलत है।
कॉलेज प्रशासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि संबंधित शिक्षक को पूर्व में ही इस बैनर को वहां से हटाने को कहा गया था। हालांकि, त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई या बैनर को सीधे तौर पर हटवाने के बजाय, अब शिक्षक के ‘बाहर से लौटने का’ इंतजार किया जा रहा है ताकि उनके आने पर इस राजनैतिक होर्डिंग को गेट से हटाकर किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सके।
वहीं दूसरी ओर, कॉलेज के प्रबंधक/पूर्व प्राचार्य डॉ. सत्यराम प्रजापति ने करीब एक सप्ताह से लगे बैनर पर अनभिज्ञता जताई और कहा— “जानकारी नहीं है, देख लेता हूं… कोई लड़का-वड़का लगा दिया होगा।”
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