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स्वास्थ्य मंत्रालय का बड़ा फैसला: IPC ने जारी की NFI 2026 की पब्लिक नोटिस; डॉक्टरों और फार्मासिस्टों के लिए तय हुए दवाओं के कड़े मानक
जेनेरिक और सस्ती दवाओं को बढ़ावा: NLEM, जनऔषधि और विशेषज्ञों की सिफारिश पर तैयार हुई नई सूची; जानिए मरीजों पर इसका क्या असर पड़ेगा
“क्या आपकी पर्ची पर लिखी दवा वाकई आपके लिए सबसे सुरक्षित और असरदार है? केंद्र सरकार के भेषज संहिता आयोग (IPC) ने देश में दवाओं के बेजा इस्तेमाल को रोकने और सही इलाज सुनिश्चित करने के लिए ‘नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया (NFI) 2026’ जारी कर दी है। जानिए इस नए फैसले के प्रमुख बिंदु!”

गाजियाबाद/नई दिल्ली:
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC) ने ‘नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया (NFI) 2026’ से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पब्लिक नोटिस (14 अक्टूबर 2026) जारी किया है।
IPC के अनुसार, NFI 2026 एक आधिकारिक संदर्भ दस्तावेज (Authoritative Reference Document) है। इसका मुख्य मकसद देश भर में दवाओं के तर्कसंगत (Rational) और साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) उपयोग को बढ़ावा देना है। यह गाइडलाइन डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सटीक दवाएं चुनने, सही खुराक तय करने और सुरक्षित इलाज देने में मदद करेगी।
📌 NFI 2026: दवाओं के चयन के 5 बड़े आधार
IPC के पब्लिक नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि NFI 2026 में दवाओं के मोनोग्राफ (Monographs) को निम्नलिखित मुख्य मानकों के आधार पर शामिल किया गया है:
- आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (NLEM): भारत में जीवनरक्षक और आवश्यक मानी गई दवाएं।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम (NHPs): सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में इस्तेमाल होने वाली दवाएं।
- CDSCO की मंजूरी: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा स्वीकृत दवाएं।
- इंडियन फार्माकोपेया (IP) मानक: वे दवाएं जिनके गुणवत्ता मानक IP में तय हैं।
- विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) की सिफारिशें:
- हेल्थ इमरजेंसी: स्वास्थ्य संकट या आपातकालीन स्थिति में उपयोगी दवाएं।
- राज्य प्राधिकरण से मंजूरी: ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत State Licensing Authority द्वारा अनुमोदित दवाएं।
- प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP): आम जनता तक किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से शामिल साल्ट।
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💡 डॉक्टरों और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के लिए दिशा-निर्देश
- मार्गदर्शक दस्तावेज: IPC ने साफ किया है कि NFI 2026 एक गाइडेंस डॉक्यूमेंट है। यह कानूनी रूप से अनिवार्य (Legally Binding) नहीं है, बल्कि चिकित्सकीय निर्णय लेने में सहायता प्रदान करता है।
- डॉक्टरों का क्लिनिकल विवेक: दवा लिखते (Prescribe करते) समय डॉक्टरों को अपने व्यावसायिक निर्णय और क्लिनिकल अनुभव का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
- फीडबैक और संशोधन: NFI एक डायनामिक दस्तावेज है। IPC ने भविष्य के संशोधनों के लिए सभी हितधारकों से आधिकारिक ईमेल (lab.ipc@gov.in) पर सुझाव मांगे हैं।
रिपोर्टर: फास्ट ब्लिट्ज 24 स्पेशल डेस्क
स्रोत: भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार
(कॉपीराइट: Fast Blitz 24 — खबरों का सबसे सटीक और तेज़ नेटवर्क)




