दवाइयों में मिलावट पर शिकंजा: हाई-रिस्क सॉल्वेंट्स और एक्सपिएंट्स की हर खेप की होगी डिजिटल ट्रैकिंग और टेस्टिंग
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ONDLS पोर्टल लाइव: ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कफ सिरप जैसी जीवनरक्षक दवाओं की सप्लाई चेन को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए निर्माताओं को ONDLS पोर्टल पर डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत रजिस्ट्रेशन और हर बैच का डेटा (CoA सहित) अपलोड करना अनिवार्य कर दिया है। बिना सिस्टम-जनरेटेड एनओसी (NOC) के अब किसी भी बैच की बिक्री नहीं हो सकेगी।
- मिलावटखोरों की अब खैर नहीं! क्या आप जो कफ सिरप पी रहे हैं, वह जीवन दे रहा है या जहर? हालिया चेतावनियों के बाद सरकार ने कस ली है कमर—अब एक-एक सॉल्वेंट का हिसाब देना होगा और हर बैच की टेस्टिंग अनिवार्य होगी, वरना सीधा ताला लगेगा!

Fast Blitz 24
कफ सिरप और दवाइयों में मिलावट पर सख्त कार्रवाई: हाई-रिस्क सॉल्वेंट्स के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और हर बैच की टेस्टिंग अनिवार्य
नई दिल्ली |
देश में कफ सिरप और अन्य फार्मास्युटिकल उत्पादों में जहरीले तत्वों (जैसे कि डीईजी – DEG) की मिलावट और उससे होने वाले गंभीर खतरों को रोकने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने कड़े कदम उठाए हैं. ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी द्वारा जारी नए निर्देशों के तहत दवा निर्माताओं और सप्लायर्स पर नकेल कस दी गई है.
क्या हैं नए निर्देश?
- ONDLS पोर्टल पर डिजिटल मॉनिटरिंग: CDSCO ने ऑनलाइन नेशनल ड्रग लाइसेंसिंग सिस्टम (ONDLS) पोर्टल पर एक नया ‘डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम’ (DMS) लाइव कर दिया है.
- अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: फार्मा ग्रेड के हाई-रिस्क सॉल्वेंट्स और एक्सपिएंट्स (Excipients) बनाने वाले सभी निर्माताओं और वेंडर्स को तुरंत ONDLS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा.
- बैच-वाइज डेटा अपलोड: निर्माताओं को प्रत्येक निर्मित बैच की मात्रा, सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस (CoA), वेंडर का विवरण और आगे की सप्लाई चेन का पूरा ट्रैक-रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड करना होगा.
- सिस्टम जनित NOC के बिना बिक्री बंद: नए नियमों के अनुसार, DMS पर विवरण अपलोड करने और सिस्टम-जनरेटेड एनओसी (NOC) प्राप्त करने के बाद ही किसी भी बैच की सप्लाई या वितरण बाजार में किया जा सकेगा.
लिस्ट में शामिल हैं ये 10 हाई-रिस्क सॉल्वेंट्स
CDSCO की ओर से जारी एनेक्स्चर-1 के मुताबिक, जिन सॉल्वेंट्स पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी उनमें प्रमुख हैं:
- ग्लिसरीन (Glycerin)
- प्रोपलीन ग्लाइकोल (Propylene Glycol)
- माल्टिटोल और माल्टिटोल सॉल्यूशन
- सोर्बिटोल और सोर्बिटोल सॉल्यूशन
- हाइड्रोजनीकृत स्टार्च हाइड्रोलाइजेट
- पॉलीइथाइलीन ग्लाइकोल (MW <1000)
- डाइथाइलीन ग्लाइकोल स्टीएरेट्स
- पॉलीइथाइलीन ग्लाइकोल मोनोमेथिल ईथर
- पॉलीसोर्बेट्स और अन्य संबंधित तत्व
- एथिल अल्कोहल
सप्लाई चेन की शुद्धता और मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि
गौरतलब है कि हाल के दिनों में कफ सिरप में मिलावट की घटनाओं ने देश-दुनिया में गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा की थीं. इसे देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की गई थीं. प्रशासन का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से सप्लाई चेन पूरी तरह पारदर्शी होगी और मिलावटखोरों पर समय रहते लगाम लगेगी।
विशेष रिपोर्ट: Fast Blitz 24




