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NFI 2026 पर IPC का बड़ा स्पष्टीकरण: फॉर्मूलरी में दवा का नाम होना या न होना, अपने आप तय नहीं करता उसकी कानूनी स्थिति

14 अक्टूबर के सार्वजनिक नोटिस में भारतीय भेषज संहिता आयोग ने कहा— NFI मार्गदर्शक दस्तावेज है, कानूनी प्रावधानों का विकल्प नहीं; दवाओं के उपयोग में चिकित्सकीय विवेक और नियामकीय नियमों का पालन जरूरी।

नई दिल्ली/गाजियाबाद | Pharma & Healthcare News
क्या नेशनल फॉर्मूलरी ऑफ इंडिया (NFI) 2026 में किसी दवा या उसकी विशेष स्ट्रेंथ का उल्लेख नहीं है, तो उसका इस्तेमाल प्रतिबंधित माना जाएगा? भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC) के 14 अक्टूबर 2026 के सार्वजनिक नोटिस का संदेश स्पष्ट है— NFI एक मार्गदर्शक दस्तावेज है, अपने आप में कानूनी रूप से बाध्यकारी आदेश नहीं। हालांकि, इसका अर्थ यह भी नहीं है कि किसी दवा के इस्तेमाल के लिए लागू मंजूरी और नियामकीय नियमों की अनदेखी की जा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
भारतीय भेषज संहिता आयोग (Indian Pharmacopoeia Commission—IPC), गाजियाबाद ने 14 अक्टूबर 2026 को National Formulary of India (NFI) 2026 के संबंध में सार्वजनिक नोटिस जारी किया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन आयोग ने इस नोटिस में फॉर्मूलरी की प्रकृति, दवाओं को शामिल करने के आधार और स्वास्थ्य पेशेवरों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया है।
आयोग के अनुसार, NFI 2026 का उद्देश्य दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन, वितरण और मरीजों को दिए जाने वाले उपचार में प्रमाण-आधारित जानकारी उपलब्ध कराना तथा दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है।
NFI कानूनी आदेश नहीं, लेकिन नियमों की अनदेखी भी नहीं
सार्वजनिक नोटिस में IPC ने स्पष्ट किया है कि NFI एक मार्गदर्शक दस्तावेज है। इसे लागू वैधानिक प्रावधानों और नियामकीय आवश्यकताओं का विकल्प नहीं माना जा सकता।
इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि दवाओं के चयन और उपयोग के संबंध में फॉर्मूलरी को एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी दवा की मंजूरी, उसके अनुमोदित उपयोग और संबंधित नियमों की स्थिति का निर्धारण लागू नियामकीय प्रावधानों के अनुसार ही होगा।
पांच प्रमुख आधारों पर शामिल होती हैं दवाएं
IPC के सार्वजनिक नोटिस के अनुसार, NFI 2026 में दवाओं के मोनोग्राफ शामिल करने के लिए प्रमुख रूप से इन आधारों पर विचार किया जाता है—
- राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (NLEM): भारत की राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल औषधियां।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम: विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं।
- CDSCO की मंजूरी: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से अनुमोदित दवाएं।
- भारतीय भेषज संहिता के मानक: जिन औषधियों के लिए Indian Pharmacopoeia (IP) में मानक निर्धारित हैं।
- विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें: चिकित्सकीय महत्व, आपातकालीन उपयोग, लागू कानूनों के अंतर्गत राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण की मंजूरी तथा प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) जैसी संबंधित परिस्थितियों के आधार पर चयनित दवाएं।
दवा की स्ट्रेंथ को लेकर क्या है महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण?
IPC ने स्पष्ट किया है कि किसी दवा के मोनोग्राफ में उल्लिखित फॉर्मूलेशन और सामान्य स्ट्रेंथ का निर्धारण चिकित्सा एवं फार्मास्यूटिकल साहित्य, लागू CDSCO मंजूरियों, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में दवा के उपयोग तथा विशेषज्ञों की राय को ध्यान में रखकर किया जाता है।
आयोग के नोटिस का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि NFI में किसी दवा की एक विशेष स्ट्रेंथ शामिल होने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसी दवा की अन्य स्ट्रेंथ का प्रिस्क्रिप्शन नहीं किया जा सकता।
हालांकि, किसी अन्य स्ट्रेंथ या फॉर्मूलेशन का इस्तेमाल संबंधित दवा की नियामकीय मंजूरी, लागू कानूनों और चिकित्सकीय उपयुक्तता के अनुरूप होना चाहिए।
डॉक्टरों और फार्मासिस्टों के लिए क्या संदेश?
IPC ने स्वास्थ्य पेशेवरों से दवाएं लिखते समय अपने पेशेवर विवेक और चिकित्सकीय विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने की अपेक्षा की है। नोटिस के अनुसार, यदि फॉर्मूलरी की सामग्री और लागू वैधानिक या नियामकीय आवश्यकताओं के बीच कोई असंगति हो, तो संबंधित वैधानिक प्रावधानों और नियामकीय नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
यह निर्देश डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, अस्पतालों और दवा वितरण से जुड़े प्रतिष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण है। दवाओं की उपलब्धता, स्ट्रेंथ या उपयोग के संबंध में केवल NFI में नाम होने अथवा न होने को अंतिम कानूनी निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
समय-समय पर संशोधित होगी फॉर्मूलरी
आयोग ने बताया है कि NFI एक गतिशील दस्तावेज है। इसकी समय-समय पर समीक्षा और संशोधन किया जाता है, ताकि चिकित्सकीय अनुभव, नए वैज्ञानिक प्रमाण और विशेषज्ञों की सिफारिशों के अनुरूप जानकारी को अद्यतन रखा जा सके।
IPC ने संबंधित पक्षों से भविष्य के संशोधनों के लिए टिप्पणियां, सुझाव और चिकित्सकीय जानकारियां भेजने का आग्रह भी किया है। इसके लिए नोटिस में lab.ipc@gov.in ईमेल पता दिया गया है।
दवा कारोबारियों के लिए क्यों जरूरी है यह सूचना?
NFI 2026 से संबंधित यह स्पष्टीकरण दवा कारोबार और फार्मेसी क्षेत्र के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि फॉर्मूलरी के मार्गदर्शन और किसी दवा की वैधानिक मंजूरी के बीच अंतर समझना आवश्यक है।
दवा विक्रेताओं और फार्मासिस्टों को दवाओं की खरीद, भंडारण, बिक्री और वितरण के दौरान लागू नियमों का पालन करना चाहिए। किसी दवा की कानूनी स्थिति को लेकर संदेह होने पर संबंधित नियामकीय दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकरण की जानकारी को आधार बनाना चाहिए।
FAST BLITZ 24 की खास बात
फॉर्मूलरी मार्गदर्शन देती है, लेकिन दवा की वैधानिक स्थिति लागू कानून और नियामकीय मंजूरी से तय होती है। IPC के 14 अक्टूबर 2026 के सार्वजनिक नोटिस का मूल संदेश यही है कि दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग के साथ-साथ नियामकीय अनुपालन को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
स्रोत: भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC), गाजियाबाद — Public Notice for NFI-2026, दिनांक 14 अक्टूबर 2026।
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