
वॉशिंगटन.. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने गाजा प्रस्ताव में शामिल करने के लिए भारत को भी न्योता भेजा है। भारत से पहले ये न्योता पाकिस्तान और तुर्की को भेजा गया था। पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रस्ताव में शामिल होने को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। बहुत उम्मीद है कि तुर्की और पाकिस्तान, ट्रंप के गाजा “बोर्ड ऑफ पीस” का हिस्सा बनें। इसका मकसद, तबाह हो चुके गाजा में फिर से शासन की स्थापना करना, उसका पुननिर्माण करना और हमास का निरस्त्रीकरण शामिल है। वाइट हाउस ने इस “बोर्ड ऑफ पीस” को लेकर कहा है कि “ये एक मुख्य बोर्ड होगा, जिसकी अध्यक्षता खुद डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। युद्ध से तबाह इलाके पर शासन के लिए टेक्नोक्रेट्स की एक फिलीस्तीनी कमेटी होगी और एक दूसरा एग्जीक्यूटिव बोर्ड होगा, जिसे ज्यादा सलाह देने वाली भूमिका के लिए डिजाइन किया गया है।”


पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप के गाजा “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल होने का न्योता मिलने की पुष्टि की है। लेकिन भारत क्या करे, इसको लेकर कई डिप्लोमेटिक जटिलताए हैं। हालांकि भारत एक ऐसा देश है, जिसे इजरायल के साथ साथ फिलीस्तीन भी स्वीकार करता है। भारत के दोनों से अच्छे संबंध हैं। इजरायल के साथ जहां मजबूत रणनीतिक संबंध हैं, वहीं भारत ने फिलीस्तीन की मदद के लिए पिछले कई वर्षों से मानवीय सहायता भेजकर मदद की है। लेकिन क्या इस बोर्ड में भारत को शामिल होना चाहिए, एक्सपर्ट्स की राय इसको लेकर बंटी हुई है।
बोर्ड ऑफ पीस (BoP) की स्थापना 15 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप ने की है। इसे एक ट्रांज़िशनल गवर्निंग एडमिनिस्ट्रेशन और ओवरसाइट बॉडी के तौर पर डिजाइन किया गया है। ये बोर्ड, डोनाल्ड ट्रंप के गाजा को लेकर बनाए गये 20 सूत्रीय एजेंडे को लागू करने के लिए काम करेगा। इसकी मुख्य जिम्मेदारियों में गाजा में एक अस्थायी शासन की स्थापना करना होगा और टेक्नोक्रेट्स की टीम में 12 सदस्य होंगे। इसके अलावा इसका काम गाजा के पुननिर्माण के लिए अंतर्राष्ट्रीय फंड जुटाना होगा। इस बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए 1 अरब डॉलर की फीस रखी गई है। यानि, जो देश शामिल होगा, उसे एक अरब डॉलर देने होंगे। इसके अलावा सबसे बड़ी बात, इस बोर्ड का काम, हमास के निरस्त्रीकरण के लिए मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स की कमान वाली अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) की तैनाती की दिशा में काम करना। अभी तक जिन देशों को न्योता भेजा गया है, उनमें भारत, पाकिस्तान के अलावा कतर, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, अल्बानिया, हंगरी, पराग्वे, जॉर्डन, ग्रीस, कनाडा, तुर्की, मिस्र और अर्जेंटीना हैं। इजरायल ने कतर और तुर्की को शामिल करने को लेकर खुला विरोध किया है।
Author: fastblitz24



