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श्रीकृष्ण की ‘गोवर्धन लीला’ से भावविभोर हुए श्रद्धालु, इंद्र का अहंकार मर्दन और 56 भोग का प्रसंग

 

विशेष संवाददाता जौनपुर

​जौनपुर जिले के सिकरारा ब्लॉक स्थित खानापट्टी गांव में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गुरुवार को भक्ति की अविरल धारा बही। कथावाचक पंडित मुरारी श्याम पांडेय ‘व्यास’ ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के अहंकार को तोड़ने और गिरिराज गोवर्धन की पूजा के प्रसंग का सजीव वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध हो गया।

​स्थानीय निवासी कमलेश सिंह के आवास पर आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन में व्यास जी ने कहा कि द्वापर युग में भगवान का अवतार अधर्म के विनाश और सत्य की स्थापना के लिए हुआ था। उन्होंने बाल्यकाल में ही पूतना और बकासुर जैसी आसुरी शक्तियों का अंत किया तथा कालिया नाग का दमन कर यमुना को प्रदूषण मुक्त करने का संदेश दिया।

प्रकृति संरक्षण और अहंकार का त्याग

​कथा के मुख्य प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए पंडित मुरारी श्याम पांडेय ने बताया कि जब देवराज इंद्र को अपनी सत्ता का अभिमान हो गया, तब भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को प्रकृति (गोवर्धन पर्वत) की महत्ता समझाई।

​”इंद्र के प्रकोप से ब्रज को बचाने के लिए भगवान ने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर धारण किया। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि ईश्वर के समक्ष अहंकार टिक नहीं सकता और वे सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।”

 

जीवंत झांकी और 56 भोग

​कार्यक्रम के दौरान भगवान द्वारा गिरिराज पर्वत उठाने की एक नयनाभिराम झांकी सजाई गई। झांकी के दर्शन करते ही पांडाल ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गुंजायमान हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान को सामूहिक रूप से ’56 भोग’ अर्पित किए।

​मुख्य यजमान कमलेश सिंह एवं उनकी पत्नी गिरजा सिंह ने व्यास पीठ और भगवान की आरती उतारकर पूजन संपन्न किया। इस अवसर पर डॉ. जोखन सिंह, वेद प्रकाश सिंह, गुलाल सिंह, राजाराम सिंह, और प्रधान पति सुशील सिंह सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक और महिला श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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Author: fastblitz24

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