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जौनपुर पुलिस की ‘डिजिटल स्ट्राइक’: ₹20 लाख के मोबाइल बरामद, मालिकों को सुपुर्द

3.28 करोड़ की कुल बरामदगी के साथ जौनपुर पुलिस ने गाड़ा सफलता का झंडा

सात राज्यों तक फैला खाकी का जाल

तकनीकी निगरानी और CEIR पोर्टल की मदद से साइबर सेल ने अब तक कुल 1,640 फोन किए बरामद; पुलिस ने जारी की साइबर सुरक्षा एडवायजरी

जौनपुर ब्यूरो | 12 मई, 2026

​जौनपुर जनपद की साइबर क्राइम सेल और विभिन्न थानों की पुलिस टीम ने खोए हुए मोबाइल फोनों की बरामदगी के अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल की है। केंद्र सरकार के ‘सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर’ (CEIR) पोर्टल और तकनीकी सर्विलांस के प्रभावी उपयोग से पुलिस ने ₹20 लाख की बाजार कीमत वाले 125 मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को सुपुर्द कर दिए हैं।

​वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) जौनपुर, श्री कुँवर अनुपम सिंह के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान के तहत अब तक कुल 1,640 मोबाइल बरामद किए जा चुके हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹3.28 करोड़ है।

अंतर्राज्यीय स्तर पर हुई बरामदगी

​अपर पुलिस अधीक्षक (नगर/नोडल साइबर थाना) श्री आयुष श्रीवास्तव ने बताया कि ये मोबाइल केवल उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों (जैसे आजमगढ़, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर) से ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों जैसे दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार और राजस्थान से भी बरामद किए गए हैं। बरामद सेटों में मुख्य रूप से वन प्लस, वीवो, सैमसंग, ओप्पो और रियलमी जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के महंगे स्मार्टफोन शामिल हैं।

पुलिस की सक्रियता और जनसेवा

​क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम, श्री देवेश सिंह के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक महेश पाल सिंह और राजेश कुमार यादव के नेतृत्व वाली टीम ने इन फोनों को ट्रैक किया। मोबाइल वापस पाकर पीड़ितों ने पुलिस प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

थानावार बरामदगी के आंकड़े:

  • साइबर क्राइम थाना: 34 मोबाइल
  • शाहगंज/खुटहन: क्रमश: 08 और 09 मोबाइल
  • मड़ियाहूँ/रामपुर: 08-08 मोबाइल
  • अन्य थाने: लाइनबाजार, कोतवाली और केराकत सहित जनपद के कुल 24 थानों की सेल इस अभियान में सक्रिय रही।

विशेष: साइबर सुरक्षा के लिए पुलिस की ‘गोल्डन रूल्स’ एडवायजरी

​पुलिस विभाग ने मोबाइल धारकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए एक विस्तृत सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किया है:

  • तत्काल रिपोर्टिंग: मोबाइल गुम होने पर तुरंत थाने में प्राथमिकी दर्ज कराएं और CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें ताकि हैंडसेट को ब्लॉक किया जा सके।
  • वित्तीय सुरक्षा: किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर TeamViewer या AnyDesk जैसे रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें। याद रखें, पैसा प्राप्त करने के लिए UPI पिन या MPIN की आवश्यकता नहीं होती।
  • सतर्कता: अनजान वीडियो कॉल से बचें और सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक या QR कोड को स्कैन न करें।
  • हेल्पलाइन: साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
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Author: fastblitz24

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