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जौनपुर में नारी शक्ति का हल्लाबोल: ‘हक हमारा दे दो, वरना जंग जारी है’

​नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के रुख के खिलाफ भाजपा महिला मोर्चा का धरना

 

जिला मंत्री अंशु कुशवाहा बोलीं- अब चुप नहीं रहेंगे

जौनपुर | जिले में ‘महिला जन आक्रोश’ के बैनर तले भाजपा महिला मोर्चा की दिग्गज नेत्रियां सड़कों पर उतरीं। विपक्षी सांसद प्रत्याशी बाबू सिंह कुशवाहा द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के विरोध को लेकर महिलाओं ने कड़ा रोष जताया। कलेक्ट्रेट के पास आयोजित धरना प्रदर्शन में वक्ताओं ने दो-टूक कहा कि संसद में 33% भागीदारी महिलाओं का अधिकार है, कोई खैरात नहीं।

प्रमुख गर्जना: “घर चलाने वाली नारी अब नीतियां भी तय करेगी”

​धरने को संबोधित करते हुए भाजपा की जिला मंत्री अंशु कुशवाहा ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि नारी शक्ति ने हमेशा देश को दिशा दी है, लेकिन जब अधिकारों की बात आती है तो देरी क्यों? उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा:

​”नारी वंदन अधिनियम में देरी सिर्फ कानून की देरी नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं के सपनों की देरी है। यह खामोश गूँज कल के बदलाव की आहट है। अब सहा नहीं जाएगा, अब चुप रहा नहीं जाएगा।”

 

विपक्ष पर हमला: “वंदन नहीं, हमें अधिकार चाहिए”

​महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रागिनी सिंह ने सीधे तौर पर विपक्षी उम्मीदवार बाबू सिंह कुशवाहा को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने दशकों तक इस बिल को फाइलों में दबाए रखा और आज जब यह हकीकत बना है, तो वे इसका विरोध कर रहे हैं।

  • रागिनी सिंह का सवाल: “विपक्ष ने बिल की राह में रोड़े अटकाए। जब माँ भारती की बेटियों को हक मिल रहा था, तब विपक्षी नेता साजिश रच रहे थे।”
  • राखी सिंह (जिला उपाध्यक्ष): “क्या विपक्ष को डर है कि महिलाएं सदन में आईं तो उनकी परिवारवाद की राजनीति खत्म हो जाएगी? जो अधिकार छीनेगा, वो सत्ता से हाथ धोएगा।”

प्रोफेसर अंजना सिंह ने दी चेतावनी: “असली चेहरा बेनकाब हो चुका है”

​टीडी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर अंजना सिंह ने कहा कि संसद में विपक्ष का महिला विरोधी चेहरा बेनकाब हो चुका है। अब महिलाएं जाग चुकी हैं और अपना हक लेना जानती हैं। जब तक विपक्ष इस सोच के लिए माफी नहीं मांगता, संघर्ष जारी रहेगा।

ये रहीं मौजूद

​इस विशाल धरने में मुख्य रूप से मैनिका सिंह, शशि मौर्य, विमला श्रीवास्तव, किरन मिश्रा, प्रीति गुप्ता, सारिका सोनी, वंदना सिंह और मिलन श्रीवास्तव सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।

 ब्लिट्ज विचार: महिलाओं का यह आक्रोश आगामी चुनावों में जौनपुर की राजनीतिक दिशा तय कर सकता है। 33% आरक्षण का मुद्दा अब केवल सदन तक सीमित नहीं, बल्कि गलियों और चौराहों की बहस बन चुका है।

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Author: fastblitz24

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