Fastblitz 24

औद्योगिक क्षेत्र के लिए भूमि अधिग्रहण का ग्रामीणों ने किया पुरजोर विरोध

​ राज्य मंत्री के करीबी को सौंपा ज्ञापन

15 हजार की आबादी के सामने पलायन व बेरोजगारी का संकट

​ उपजाऊ भूमि बचाने की लगाई गुहार, प्रशासन पर बिना सहमति प्रस्ताव भेजने का गंभीर आरोप

जौनपुर।करंजा कला ब्लाक क्षेत्र के ग्रामसभा चौंदीगहना, भकुरॉ, चकवॉ, आरा एवं दुधौरा के ग्रामीणों ने प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए होने वाले भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) खेल एवं युवा कल्याण गिरीश चंद्र यादव के चचेरे भाई सुनील यादव को एक ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित अधिग्रहण को तत्काल रोकने की मांग की है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि उनकी उपजाऊ कृषि भूमि को जबरन अधिग्रहित किया गया, तो क्षेत्र की लगभग 15 हजार की आबादी के सामने पलायन, बेरोजगारी और भूमिहीन होने का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

​समाचार पत्र की खबर से मचा हड़कंप

​सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने उल्लेख किया है कि बीते 11 अप्रैल 2026 को एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर से उन्हें इस बात की जानकारी मिली थी कि उक्त पांच गांवों की करीब 1976 एकड़ भूमि को औद्योगिक गलियारा (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) विकसित करने के लिए अधिग्रहित किया जाना प्रस्तावित है। इस खबर के सामने आने के बाद से ही सभी संबंधित गांवों में भय और असमंजस का माहौल बना हुआ है।

​प्रशासन की चुप्पी पर उठाए सवाल

​ग्रामीणों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि खबर प्रकाशित हुए एक माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक इसका कोई खंडन नहीं किया गया है। इसके विपरीत, राजस्व अधिकारियों द्वारा दबी जुबान से यह स्वीकार किया जा रहा है कि इस संबंध में प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।

नियमों की अनदेखी का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित भूमि अत्यंत उपजाऊ है, जहां सालभर विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। क्षेत्र के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग के हैं, जिनके पास मात्र 10 बिस्वा से लेकर दो एकड़ तक ही भूमि है। आरोप है कि बिना किसानों की सहमति और भौगोलिक स्थिति का सही आकलन किए ही यह आत्मघाती प्रस्ताव तैयार कर लिया गया, जबकि नियमानुसार किसी भी अधिग्रहण के लिए 70 से 80 प्रतिशत किसानों की लिखित सहमति अनिवार्य होती है।

 

​शहरी क्षेत्र से निकटता और प्रदूषण का खतरा

​ग्रामीणों ने भौगोलिक स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि प्रस्तावित क्षेत्र नगर पालिका सीमा से महज छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सिटी बाईपास फोरलेन का निर्माण होने के बाद यह पूरा इलाका स्वतः ही शहरी क्षेत्र में तब्दील हो जाएगा। ऐसे में घनी आबादी से बिल्कुल सटी हुई भूमि पर भारी उद्योगों की स्थापना करना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि उद्योगों से निकलने वाले जहरीले धुएं और प्रदूषित पानी के कारण आने वाले समय में स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर बेहद घातक असर पड़ेगा।

fastblitz24
Author: fastblitz24

Spread the love

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज