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शिक्षकों ने समस्याओं को लेकर कुलपति और कुलसचिव से की मुलाकात; निस्तारण न होने पर दी आंदोलन की चेतावनी

जौनपुर।

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में प्रशासनिक, शैक्षणिक और परीक्षा संबंधी अव्यवस्थाओं को लेकर शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा है। विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर आज शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति प्रो. वंदना सिंह और कुलसचिव महेंद्र कुमार (केशलाल) से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण नहीं हुआ, तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

​विश्वविद्यालय की साख पर उठ रहे सवाल

​प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय में लगातार बढ़ रही अनियमितताओं, पक्षपातपूर्ण कार्यशैली और प्रशासनिक लचरता को उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक बताया। शिक्षकों का आरोप है कि विश्वविद्यालय इस समय गंभीर संकटों से जूझ रहा है। ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों को उठाया गया:

  • भ्रष्टाचार के आरोप: पुस्तकालय एवं पुस्तक खरीद में कथित भ्रष्टाचार और उड़ाका दल (फ्लाइंग स्क्वाड) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए।
  • नियमों की अनदेखी: विश्वविद्यालय के अधिनियम, परिनियम, अध्यादेश और शासनादेशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
  • पक्षपातपूर्ण रवैया: विद्या परिषद (एकेडमिक काउंसिल) और अध्ययन परिषद (बोर्ड ऑफ स्टडीज) के गठन के साथ-साथ मूल्यांकन व निगरानी समितियों की नियुक्तियों में भारी पक्षपात का आरोप है।
  • पारिश्रमिक में देरी: परीक्षा और मूल्यांकन कार्य के पारिश्रमिक भुगतान में अत्यधिक देरी के कारण शिक्षकों में गहरा असंतोष है।

​पीएचडी प्रक्रिया और परीक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल

​शिक्षकों ने परीक्षा परिणामों में लगातार हो रही त्रुटियों और चयन समितियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। इसके अलावा पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में हो रहे अनावश्यक विलंब को शोधार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें:

  • ​शोधार्थियों को अनावश्यक आर्थिक बोझ और भागदौड़ से बचाने के लिए पीएचडी कोर्स वर्क की कक्षाएं और वायवा (मौखिक परीक्षा) ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जाएं।
  • ​प्रत्येक कार्य दिवस (छुट्टियों के दिनों में किए गए कार्य) के बदले शिक्षकों को एक प्रतिकार अवकाश (कंपनसेट्री लीव) प्रदान किया जाए, ताकि उनके अतिरिक्त कार्यभार का उचित सम्मान हो सके।

 

​कुलपति ने दिया आश्वासन

​शिक्षकों की मांगों को सुनने के बाद कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने आश्वासन दिया कि पीएचडी कोर्स वर्क और वायवा को ऑनलाइन करने के संबंध में जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, शिक्षक इस आश्वासन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने साफ कहा कि अगर फाइलों और फैसलों में प्रशासनिक विलंब बंद नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे।

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल:

इस दौरान कुलपति और कुलसचिव से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से प्रो. जेपी सिंह, प्रो. आलोक सिंह, प्रो. लक्ष्मण सिंह, डॉ. जयप्रकाश सिंह, डॉ. जितेश सिंह, डॉ. यदुवंश कुमार, डॉ. प्रशांत त्रिवेदी तथा डॉ. अवनीश यादव समेत विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ शिक्षक मौजूद थे।

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Author: fastblitz24

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