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भाषा पर ‘वोट बैंक’ की राजनीति देश को करेगी खोखला, हिंदी के विरोध से सत्ता तो मिल जाएगी… पर मिट जाएगा ज्ञान!

​मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के द्विशताब्दी समारोह में बरसे मुख्यमंत्री फडणवीस; बोले- मातृभाषा से ही होगा देश का विकास, हिंदी पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने वाला मजबूत धागा

        ​मुंबई, 2 जून। देश में भाषा को लेकर राजनीति करने वालों और हिंदी का विरोध कर अपनी रोटियां सेकने वाले सियासी सूरमाओं को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दो टूक शब्दों में आड़े हाथों लिया है। मुंबई हिंदी पत्रकार संघ द्वारा आयोजित हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी (200 वर्ष) समारोह में मुख्यमंत्री फडणवीस ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भाषा कभी भी विवाद का माध्यम नहीं हो सकती। हिंदी इस देश की संपर्क सूत्र है। कुछ लोग भाषाओं के नाम पर विवाद पैदा कर वोट और सत्ता तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि इस संकीर्ण राजनीति से देश का ज्ञान समाप्त हो जाएगा। अगर ज्ञान ही मिट गया, तो हम इसे आने वाली पीढ़ियों तक कैसे पहुंचा पाएंगे?

​प्रभादेवी स्थित रविंद्र नाट्यमंदिर में आयोजित इस भव्य समारोह में फडणवीस ने दो टूक कहा कि स्वतंत्रता की लड़ाई में हिंदी का अद्वितीय योगदान रहा है, इसलिए इसका विशेष रूप से सम्मान होना चाहिए।

​’मातृभाषा छोड़ना, नैसर्गिक ज्ञान प्रक्रिया से बाहर होना’

​मुख्यमंत्री ने बहुभाषी होने की वकालत करते हुए कहा कि मातृभाषा को छोड़ना खुद को एक नैसर्गिक ज्ञान प्रक्रिया से बाहर करने जैसा है। दुनिया के जिन भी देशों ने शिखर छूकर विकास किया है, उन्होंने अपनी मातृभाषाओं में ही शिक्षा हासिल की है। लेकिन, मातृभाषा के साथ-साथ अगर हम देश की अन्य भाषाएं (विशेषकर हिंदी) सीखेंगे, तो पूरे देश के ज्ञान को बटोर पाएंगे।

विदेशी भाषाओं का शौक और हिंदी से परहेज क्यों?

कार्यक्रम में मुंबई भाजपा अध्यक्ष और विधायक अमित साटम ने भाषा के नाम पर राजनीति करने वालों के दोहरे चरित्र को बेनकाब किया। उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा कि हिंदी वह धागा है जो पूरे देश को बांधता है, लेकिन कुछ स्वार्थी लोगों के लिए इसका विरोध करना एक ‘फैशन’ बन गया है। विडंबना देखिए कि हिंदी का विरोध करने वाले इन नेताओं के खुद के बच्चे फ्रेंच और जर्मन जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं।

 

​डिजिटल मीडिया के दौर में ‘विश्वसनीयता’ का संकट अस्थायी: फडणवीस

​पत्रकारिता के गिरते स्तर और चुनौतियों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने माना कि आज खबरों की क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। खासकर डिजिटल मीडिया के आने के बाद स्थितियां ज्यादा चुनौतीपूर्ण हुई हैं। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि यह दौर अस्थायी है और पत्रकारिता जल्द ही इन चुनौतियों को पीछे छोड़कर अपने पुराने स्थापित मूल्यों पर वापस लौटेगी।

​क्षेत्रीय भाषाओं के कंधे पर सवार होकर ही आगे बढ़ेगी हिंदी: ब्रजेश पाठक

​समारोह में विशेष अतिथि के रूप में पहुंचे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भाषा विवाद को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी और देश की अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में कोई टकराव नहीं है। हिंदी तभी आगे बढ़ेगी जब क्षेत्रीय भाषाएं समृद्ध होंगी। वहीं, मंत्री व विधायक मंगलप्रभात लोढ़ा ने हुंकार भरते हुए कहा कि अब मुंबई के किसी भी कोने में खड़े होकर ‘हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान’ का नारा लगाया जा सकता है। हिंदी जोड़ती है, तोड़ना हमारे संस्कारों में नहीं है।

​एआई (AI) के पास एडिटर जैसा दिमाग नहीं: प्रो. पाठक

  • विविधता में एकता: संघ के महासचिव विजय सिंह कौशिक ने एक ऐतिहासिक तथ्य रखते हुए कहा कि हिंदी का पहला अखबार एक गैर-हिंदी भाषी प्रदेश (कोलकाता) से शुरू हुआ था और आज हम इसका 200वां साल एक मराठी भाषी राज्य में मना रहे हैं। यही भारत की विविधता में एकता है।
  • एआई बनाम इंसान: प्रमुख वक्ता प्रोफेसर राम मोहन पाठक ने कहा कि तकनीकी युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भले ही कितनी भी चुनौतीपूर्ण लगे, लेकिन यह कभी भी एक संपादक (Editor) जैसा जीवंत दिमाग नहीं चला सकती।
  • कवि कलश का नाता: सम्मानित अभिनेता विनीत कुमार सिंह ने कहा कि जिस तरह माला को पिरोने के लिए एक सूत्र की जरूरत होती है, भारत के लिए वह सूत्र हिंदी ही है। उन्होंने फिल्म ‘छावा’ में निभाए अपने पात्र ‘कवि कलश’ का जिक्र करते हुए यूपी और महाराष्ट्र के सदियों पुराने रिश्तों को रेखांकित किया।

​पत्रकारिता के पुरोधाओं का हुआ सम्मान

​इस ऐतिहासिक द्विशताब्दी समारोह के मंच पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हिंदी पत्रकारिता और समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में:

  1. वरिष्ठ पत्रकार गंगाधर ढोबले
  2. कुमुद संघवी चावरे
  3. अभिनेता विनीत कुमार सिंह
  4. प्रो. राममोहन पाठक
  5. अवधेश व्यास
  6. हेमंत तिवारी
  7. प्रसिद्ध गायक सुरेश शुक्ला

ये रहे मौजूद: इस गरिमामयी मोड़ पर विधायक राजहंस सिंह, संजय उपाध्याय, मुरजी पटेल, सिद्धविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी, डॉ. राजेंद्र प्रताप सिंह (योगायतन ग्रुप), उद्योगपति ज्ञान प्रकाश सिंह, संजय पांडेय, संतोष आर एन सिंह सहित मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के अध्यक्ष आदित्य दुबे, उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र मिश्र व कार्यकारिणी सदस्य हरीगोविन्द विश्वकर्मा, अखिलेश मिश्र, अखिलेश तिवारी, अशोक शुक्ला एवं सैयद सलमान सहित भारी संख्या में गणमान्य जन उपस्थित थे।

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Author: fastblitz24

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