■ कुकुरमुत्तों की तरह उगे होटल-मैरिज लॉन, सुरक्षा मानकों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां
■ दर्जनों होटलों में एंट्री और एग्जिट का सिर्फ एक ही दरवाजा, इमरजेंसी रास्ते गायब
■ खेल निराला: धड़ल्ले से पास हो रहे नक्शे, सेटिंग-गेटिंग के खेल में मिल रही फायर NOC!
जौनपुर (विशेष संवाददाता):

राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए भीषण होटल अग्निकांड ने पूरे देश की रूह को कंपा दिया, लेकिन जौनपुर के जिम्मेदार विभागों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि जिले का प्रशासनिक अमला किसी बड़े और दर्दनाक हादसे का इंतजार कर रहा है। शहर के रिहायशी इलाकों से लेकर मुख्य चौराहों तक नियमों को ताक पर रखकर मौत का यह कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। मानकों की भयंकर अनदेखी के बीच, जौनपुर इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है और प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है।


घनी बस्तियों में ‘मौत का जाल’, संकरी गलियों में कैसे पहुंचेगी दमकल?
नगर के हृदय स्थल ओलंदगंज, पॉलिटेक्निक चौराहा, नईगंज, रोडवेज तिराहा, चहारसू चौराहा, सिपाह, जौनपुर जंक्शन, चौकियां धाम, कुत्तूपुर से लेकर शहर के बाईपास और वाराणसी मार्ग तक होटल, लॉज, गेस्ट हाउस और मैरिज लॉन की बाढ़ आ गई है।
हैरानी की बात यह है कि घनी बस्तियों और बेहद संकरी गलियों में बहुमंजिला होटल तान दिए गए हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि यदि कभी कोई खुदा-ना-खास्ता आपात स्थिति पैदा हो जाए, तो वहां दमकल की गाड़ियों का पहुंचना तो दूर, पैदल निकलना भी दूभर हो जाएगा।
भयावह सच: दर्जनों होटलों में सिर्फ ‘एक’ ही दरवाजा, ISO की उड़ रही धज्जियां
जौनपुर के इन तथाकथित आलीशान होटलों और गेस्ट हाउसों का सच बेहद डरावना है। ग्राउंड जीरो की पड़ताल में सामने आया है कि:
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- नो इमरजेंसी एग्जिट: दर्जनों होटल और मैरिज लॉन ऐसे हैं, जहां आने और जाने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य दरवाजा है। इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) का कोई नामोनिशान नहीं है।
- एक्सपायर्ड सिलेंडर: जहां अग्निशमन यंत्र (फायर सिलेंडर) टंगे भी हैं, उनमें से अधिकांश शो-पीस हैं और उनकी वैधता (Validity) सालों पहले समाप्त हो चुकी है।
- बिजली के तारों का मकड़जाल: घटिया क्वालिटी के तारों और ISO मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर एयर कंडीशनर (AC) और भारी बिजली उपकरणों को दौड़ाया जा रहा है, जिससे हर वक्त शॉर्ट-सर्किट का खतरा बना रहता है।
बड़ा सवाल: “अगर कल को दिल्ली जैसा अग्निकांड जौनपुर में दोहराया गया और सिर्फ एक मुख्य रास्ते पर आग लग गई, तो अंदर मौजूद मासूम जिंदगियां बाहर कैसे निकलेंगी? इस संभावित मौत का जिम्मेदार कौन होगा?”
कागजों पर सब ‘ऑल इज वेल’, भ्रष्टाचार के साए में मिल रही NOC!
जनता के बीच सबसे बड़ा आक्रोश इस बात को लेकर है कि जब धरातल पर कोई मानक पूरा नहीं है, तो फिर इन मौत के अड्डों को हरी झंडी कैसे मिल रही है? सूत्रों की मानें तो विभाग की मिलीभगत से:
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- बिना मौके की सही जांच किए भवन के नक्शे धड़ल्ले से पास हो रहे हैं।
- चंद रुपयों और ‘सेटिंग-गेटिंग’ के खेल में फायर ब्रिगेड से एनओसी (NOC) भी जारी कर दी जा रही है।
- बिजली विभाग से लेकर नगर निकाय तक, हर जिम्मेदार महकमा इस अवैध खेल में आंखें मूंदकर बैठा है।
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प्रशासन की चुप्पी पर भड़के लोग, संयुक्त सर्वे की उठी मांग
दिल्ली की घटना के बाद जहां कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी हो रही है, वहीं जौनपुर का प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। शहरवासियों और सामाजिक संगठनों ने अब आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है।
स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी (DM), मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) और नगर निकाय प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि तत्काल प्रभाव से एक संयुक्त टीम गठित कर शहर के सभी होटल, गेस्ट हाउस और मैरिज लॉन का औचक सर्वे कराया जाए। जिन भी प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मिले, उन्हें तुरंत सील कर मालिकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
‘ फ़ास्ट ब्लिट्ज 24’ की दो टूक:
दिल्ली का होटल अग्निकांड एक आखिरी चेतावनी थी। जौनपुर प्रशासन को अब जागना ही होगा। किसी बड़े हादसे के बाद आंसू बहाने और औपचारिक जांच की लीपापोती करने से बेहतर है कि आज और अभी इन अवैध और असुरक्षित होटलों पर हथौड़ा चलाया जाए, ताकि किसी मां की गोद सूनी न हो।
Author: fastblitz24

