जौनपुर। जिला महिला चिकित्सालय का एक अजीबोगरीब मामला इन दिनों पूरे जनपद में भारी चर्चा और कौतूहल का विषय बना हुआ है। अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सी.एम.एस.) द्वारा पुरानी बिल्डिंग में पहले से लगे बेहद मजबूत और चमकदार ग्रेनाइट पत्थरों को तुड़वाकर उनके स्थान पर घटिया किस्म की टाइल्स लगवा दी गई हैं। अस्पताल प्रशासन के इस कदम को देखकर हर कोई हैरान है और तरह-तरह के सवाल उठा रहा है।
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जानकारी के अनुसार, बीते फरवरी माह में जब अस्पताल के फर्श से कीमती ग्रेनाइट पत्थरों को उखाड़ा जा रहा था, तो वहाँ मौजूद लोग दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो गए। आमतौर पर लोग पुरानी टाइल्स को हटाकर मजबूत ग्रेनाइट लगवाते हैं, लेकिन यहाँ ठीक इसका उल्टा किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि महिला अस्पताल का यह कारनामा संत कबीरदास की उस प्रसिद्ध वाणी को चरितार्थ करता है, जिसमें उन्होंने कहा था— “बरसै कम्मल भीजै पानी” (यानी सब कुछ उल्टा-पुल्टा होना)।ग्रेनाइट की गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस समय यह पत्थर महिला अस्पताल में लगाया गया था, ठीक उसी समय जिला पुरुष अस्पताल में भी यही ग्रेनाइट लगाया गया था। पुरुष अस्पताल का वह फर्श आज भी अपनी पूरी चमक के साथ सुरक्षित है और लोगों का मन मोह रहा है। वहीं दूसरी ओर, महिला अस्पताल के एक कोने में उखाड़कर फेंके गए ग्रेनाइट के टुकड़े आज भी शीशे की तरह चमक रहे हैं, जो उनकी मजबूती की गवाही दे रहे हैं |अस्पताल परिसर और जागरूक नागरिकों के बीच इस बात को लेकर तीखी चर्चा है कि वित्तीय वर्ष 2025 और 2026 के सरकारी बजट का बंदरबांट करने के उद्देश्य से ही इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया है।
Author: fastblitz24


