सनातन की हुंकार: इन्द्रेश कुमार ने किया महाआयोजन का उद्घाटन; अमेरिका तक गूंजेगी भारतीय संस्कारों की धमक

इतिहास में पहली बार ‘मातु जानकी कथा’: हजारों महिलाओं ने उठाई ‘जानकी सौगंध’, बड़कू हनुमान जी आश्रम बना ‘सिद्धपीठ’

जौनपुर, 10 जून।

वैश्विक स्तर पर टूटते परिवार, बिखरते मानवीय रिश्तों, बढ़ती हिंसा और प्रकृति के प्रति घोर लापरवाही के खिलाफ उत्तर प्रदेश के जौनपुर से एक अभूतपूर्व सांस्कृतिक युद्ध का आगाज हो चुका है। जलालपुर के पुरेव गांव स्थित बड़कू हनुमान जी आश्रम में नौ दिवसीय ‘अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुंभ’ की शुरुआत हो चुकी है, जो न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर में एक नए सांस्कृतिक पुनर्जागरण की पटकथा लिखने को तैयार है। विशाल भारत संस्थान एवं राज राजेश्वर ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस महाकुंभ में देश-विदेश के दिग्गज सामाजिक नेता, जगतगुरु, संत और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शीर्ष नेतृत्व का जमावड़ा लगा है।



जल, प्रकृति और नारी शक्ति का त्रिवेणी संगम
अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुंभ का भव्य उद्घाटन मुख्य अतिथि एवं RSS के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार ने मशाल जलाकर किया। इस अवसर पर पवित्र जानकी कुंड में सरयू, गंगा, मंदाकिनी, हनुमान धारा और संकट मोचन कुएं का पवित्र जल प्रवाहित किया गया और हंसों का जोड़ा छोड़ा गया।
सनातन धर्म सम्राट जगतगुरु बालक देवाचार्य जी महाराज, सामाजिक चिंतक डॉ. राजीव श्रीगुरुजी और मुख्य पुरोहित रिंकू महाराज ने संयुक्त रूप से जल छोड़ते हुए नारी सम्मान के साथ-साथ जल एवं प्रकृति संरक्षण का एक कड़ा वैश्विक संदेश दिया। काशी के प्रकांड विद्वानों ने नवनिर्मित नवग्रह मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा कराई, जिसे देश को समर्पित किया गया। इसी ऐतिहासिक पल पर जगतगुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने बड़कू हनुमान जी आश्रम को ‘सिद्धपीठ’ की मान्यता प्रदान की।
इतिहास के पन्नों में दर्ज हुई ‘जानकी सौगंध’
इस महाकुंभ की सबसे क्रांतिकारी विशेषता विश्व इतिहास में पहली बार आयोजित हो रही ‘मातु जानकी कथा’ है। नारी जगत को शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा देने के लिए माता जानकी (सीता जी) को आदर्श मानकर इस कथा की शुरुआत की गई।
”हजारों महिलाओं ने माथे पर कलश लेकर और हाथ में पवित्र जल लेकर कसम खाई कि वे आधुनिकता की अंधी दौड़ में अपने परिवारों और देश की संस्कृति को बिखरने नहीं देंगी। इस ऐतिहासिक संकल्प को अब इतिहास में ‘जानकी सौगंध’ के नाम से जाना जाएगा।”
इसके साथ ही, समाज में समरसता का बड़ा संदेश देते हुए महाकुंभ में 11 दलित महिलाओं को भी गुरु दीक्षा प्रदान की गई। वहीं, आश्रम के मुख्य पुरोहित प्रवीण मिश्र ‘रिंकू महाराज’ को गुरु दीक्षा के बाद अब ‘प्रभु राम दास जी महाराज’ का नया नाम दिया गया है।
“बेटी बोझ नहीं, शौर्य का प्रतीक”
मुख्य अतिथि इन्द्रेश कुमार ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा:
”दया, प्रेम, करुणा और त्याग से ही नारी परिवारों को बांधकर रखती है। तमाम विसंगतियों के बाद भी अगर भारतीय परिवार आज एकजुट हैं, तो वह हमारी सांस्कृतिक विरासत के कारण है। इस महाकुंभ के जरिए सनातन संस्कृति के मूल तत्व दुनिया के हर घर तक पहुंचेंगे।”
वहीं, धर्मसम्राट जगतगुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने अपने कड़े और मर्मस्पर्शी संदेश में कहा कि आज जो लोग बेटी को बोझ समझते हैं, उन्हें माता जानकी का चरित्र देखना चाहिए। जिन्होंने बचपन में उस शिव धनुष को एक हाथ से उठा लिया था, जिसे दुनिया का कोई बलवान राजा हिला तक नहीं सका। माता जानकी के पथ पर चलकर ही आज टूटते परिवारों को बचाया जा सकता है।
अब हर घर में स्थापित होगी ‘जानकी रसोई’
महाकुंभ की सह-संयोजक डॉ. अर्चना भारतवंशी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि इस आंदोलन के तहत केवल कथा ही नहीं होगी, बल्कि घर-घर में ‘जानकी रसोई’ की स्थापना की जाएगी, ताकि आने वाली पीढ़ी को भोजन के साथ-साथ सनातन संस्कार भी मिल सकें।
इस महासमर के गवाह बनने के लिए आभा उपाध्याय, डॉ. नजमा परवीन, डॉ. मृदुला जायसवाल, नौशाद दुबे, डॉ. कवीन्द्र नारायण, अमित श्रीवास्तव, अजीत सिंह टीका, और द्वारिका प्रसाद खरवार समेत 5 हजार से अधिक महिलाओं और राष्ट्रभक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जौनपुर की धरती से उठा यह सांस्कृतिक तूफान अब अमेरिका तक भारतीय सभ्यता का डंका बजाने के लिए निकल चुका है।
Author: fastblitz24

