* जौनपुर के जलालपुर में नौ दिवसीय अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुंभ का दूसरा दिन लोक परंपराओं को समर्पित
* जगद्गुरु श्री बालक देवाचार्य और प्रो. राजीव ने पाश्चात्य अंधानुकरण पर बोला हमला; माता जानकी को बताया विद्वत्ता, धैर्य और आत्मसम्मान का वैश्विक प्रतीक
विशेष संवाददाता

जलालपुर (जौनपुर), 11 जून


वैश्वीकरण और पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण के बीच भारतीय समाज में बिखरते संयुक्त परिवारों और नैतिक मूल्यों को बचाने के लिए लोक कलाओं को एक बड़े हथियार के रूप में रेखांकित किया गया है। जौनपुर जिले के जलालपुर (पुरेव गांव) स्थित बड़कू हनुमान जी मंदिर के प्रांगण में चल रहे नौ दिवसीय ‘अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुंभ’ के दूसरे दिन वक्ताओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि भारतीय नारियों ने अपनी लोक कलाओं के दम पर ही देश की सांस्कृतिक नींव को अक्षुण्ण रखा है। इस सांस्कृतिक पुनर्जागरण को जन-जन तक पहुंचाने के लिए महिलाओं की ‘जानकी टोली’ का गठन किया गया है, जो गांव-गांव जाकर लोक गीतों के माध्यम से माता जानकी के आदर्श चरित्र का प्रसार करेगी।
इससे पूर्व, लोक कला और संस्कृति से जुड़ी 11 प्रतिष्ठित नारियों ने संयुक्त रूप से मशाल प्रज्वलित कर महाकुंभ के दूसरे दिन के सत्र का औपचारिक उद्घाटन किया। समारोह में ग्रामीण महिलाओं ने ढोलक की थाप पर पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुति देकर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।

लोक कला मनोरंजन नहीं, हमारे अस्तित्व का जीवंत इतिहास: जगद्गुरु बालक देवाचार्य
समारोह को संबोधित करते हुए सनातन धर्म सम्राट जगद्गुरु श्री बालक देवाचार्य जी महाराज ने विश्व में पहली बार ‘मातु जानकी कथा’ का सूत्रपात किया। लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संगीतमय कथा के दौरान उन्होंने कहा:
”लोक कला और संस्कृति केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि ये हमारे समाज के इतिहास, परंपराओं, जीवन मूल्यों और हमारी जीवन शैली का जीवंत दस्तावेज हैं। प्राचीन काल से ही भारतीय महिलाओं ने घरों की दीवारों, आँगनों, वस्त्रों और दैनिक पकवानों के माध्यम से इन विधाओं को जीवित रखा है।”
जगद्गुरु ने आगे कहा कि माता जानकी का वनवासी जीवन पूरे विश्व के लिए एक अनूठा उदाहरण है। महिलाएँ परिवार की प्रथम शिक्षिका होती हैं, जो बच्चों में नैतिक मूल्य और सांस्कृतिक संस्कार बोती हैं। यदि संस्कृति को बचाना है, तो इसके सहज संरक्षण में जुटीं नारियों के योगदान को समाज में उचित सम्मान और प्रोत्साहन देना ही होगा।
पाश्चात्य संस्कृति ‘अधिकार’ सिखाती है, भारतीय संस्कृति ‘त्याग’: प्रो. (डॉ) राजीव
विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राम पंथ के पंथाचार्य प्रो. (डॉ) राजीव श्री गुरूजी ने अपने संबोधन में आधुनिक समाज की विसंगतियों पर आक्रामक और तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज भारतीय परिवारों में ईर्ष्या, नफरत और लालच की जो भावना बढ़ रही है, उसका मुख्य कारण अपनी महान संस्कृति को छोड़कर विदेशी संस्कृति से प्रभावित होना है।
सच्चा आदर्श: भारतीय वांग्मय बनाम पाश्चात्य प्रभाव
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│ विदेशी/पाश्चात्य संस्कृति │ महान भारतीय संस्कृति │
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│ • केवल अधिकार पाने की होड़ │ • सर्वोच्च त्याग को मानती है आदर्श│
│ • भौतिकतावाद और अंधी दौड़ │ • दूसरों के लिए सर्वस्व अर्पण │
│ • घृणा, लालच और बिखराव का कारण │ • भाईचारा, एकता और खुशहाली का आधार│
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प्रो. राजीव ने रामायण के महान पात्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान राम ने पिता के वचनों के लिए गद्दी छोड़ी, भरत ने भाई के लिए खड़ाऊँ शासन चलाया, लक्ष्मण और शत्रुघ्न ने 14 वर्षों तक अप्रतिम त्याग किया। उन्होंने माता जानकी को भारतीय नारी के लिए विद्वत्ता, युद्ध कौशल, त्याग, धैर्य, निष्ठा, मर्यादा और आत्मसम्मान की जीवित प्रतिमा बताया।
स्त्री के पास था राजगद्दी का समान अधिकार
डॉ. राजीव ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ साझा करते हुए बताया कि जब श्री राम को वनवास हुआ, तब महर्षि वसिष्ठ ने प्रस्ताव रखा था कि राम की अनुपस्थिति में माता जानकी अयोध्या का राजपाट संभाल सकती हैं। यह इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि हमारी सनातन संस्कृति में पुरुषों के समान ही महिलाओं को भी राजगद्दी और शासन संचालन का पूर्ण अधिकार प्राप्त था।
उन्होंने कहा कि बचपन में शिवधनुष उठा लेने वाली बलशाली और वैदिक सूत्रों का पाठ करने वाली माता जानकी ने अशोक वाटिका की भीषण विपरीत परिस्थितियों में भी रावण के सामने न झुककर अपने साहस और संयम का परिचय दिया।

’जानकी टोली’ करेगी टूटते परिवारों की रक्षा
महाकुंभ के मंच से देशवासियों का आह्वान किया गया कि यदि समाज से घृणा, लालच और पारिवारिक कलह को समाप्त करना है, तो हर घर में माता जानकी और भगवान राम के आदर्शों को स्थापित करना होगा। यदि दया, करुणा, सहनशीलता और आत्मसमर्पण जैसे मूल्य समाप्त हो गए, तो परिवार बिखर जाएंगे। ‘जानकी टोली’ इसी उद्देश्य के साथ लोक विधाओं के माध्यम से घर-घर में शांति और रिश्तों को मजबूत करने का संदेश लेकर निकलेगी।
इस भव्य वैचारिक और सांस्कृतिक समागम में बड़कू हनुमान आश्रम के मठाधीश स्वामी प्रभु रामदास जी, धर्म प्रवक्ता डॉ. कवीन्द्र नारायण, प्रसिद्ध समाजसेवी शैलेंद्र शुक्ला, डॉ. अर्चना भारतवंशी, डॉ. मृदुला जायसवाल, डॉ. नजमा परवीन, नौशाद दुबे, ओबैदुल्लाह दुबे, दक्षिता भारतवंशी, खुशी भारतवंशी, इली भारतवंशी और उजाला भारतवंशी सहित भारी संख्या में प्रबुद्धजन और मातृशक्ति उपस्थित रही।
Author: fastblitz24




